अरस्तु यूनान एक महान दार्शनिक और वैज्ञानिक सोच वाले व्यक्ति थे उनके विचार आज भी प्रासंगिक है।
अरस्तु हर शास्त्र में पारंगत थे चाहे वो राजनीतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र या नीतिशास्त्र।
हर क्षेत्र के उनके विचार आज भी शिक्षा के रूप में पढ़ाये जाते है।

वैज्ञानिक विचारधारा का जनक अरस्तु को ही माना जाता है। अरस्तु की महानता और विचार
अरस्तु को बुद्धिमानो का गुरु भी कहा गया है अरस्तु का जन्म 384 ईसवी पूर्व ग्रीक यूनान में स्टिगिरा नामक स्थान पर हुआ था। अरस्तु के पिता मकदूनिया राज्य के शाही वेध थे।
उनके के गुरु फ्लूटो थे जो भी एक महान और प्रसिद्ध दार्शनिक थे।
अरस्तु को अकेडमी का मस्तिष्क भी कहते थे।

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अरस्तू का मानना था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है और केवल चार तत्वों से बनी है मिटटी, जल, वायु, और अग्नि।
उनके मतानुसार सूरज, चाँद और सितारो जैसे खगोलीय पिंड परिपूर्ण और ईश्वरीय है और सारे पांचवें तत्व से बने है जिसे वें ईथर कहते थे।
इस प्रकार अरस्तु के जीवन पर मकदूनिया के दरबार का काफी गहरा प्रभाव पड़ा था।
उनके पिता की मौत उनके बचपन में ही हो गये थी।
17 वर्षीय अरस्तु को उनके अभिभावक ने शिक्षा पुरी करने के लिए बौद्धिक शिक्षा केंद्र एथेंस भेज दिया।
वो वहा पर बीस वर्षो तक प्लेटो से शिक्षा पाते रहे।

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अरस्तु का स्वाभाव,दर्शन व् मृत्यु…

arastu एक खोजी प्रविर्ती के थे खासकर ऐसे विषयों पर जो मानव स्वाभाव से जुड़े हों जैसे कि “आदमी को जब भी समस्या आती है वो किस तरह से इनका सामना करता है।”
आदमी का दिमाग किस तरह से काम करता है।

समाज को लोगों से जोड़े रखने के लिए काम करने वाले प्रशासन में क्या ऐसा होना चाहिए जो उचित तरीके से काम करें।
ऐसे सवालों के उतर पाने के लिए arastu अपने आस पास के माहौल पर प्रायोगिक रुख रखते हुए बड़े इत्मिनान के साथ काम करते रहते थे।

महापुरुषों के अनमोल विचार

वो अपने शिष्यों को सुबह सुबह विस्तृत रूप से और शाम को आम लोगों को साधारण भाषा में प्रवचन देते थे।
एलेक्सेंडर की अचानक मृत्यु पर मकदूनिया के विरोध के सवाल उठ खड़े हुए।
उन पर नास्तिकता का भी आरोप लगाया गया।
वो दंड से बचने के लिये चल्सिस चले गये और वहीं पर एलेक्सेंडर की मौत के एक साल बाद 62 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हो गयी।

अरस्तू द्वारा लिखे गए ग्रन्थ…

अरस्तू ने अपने जीवन मे 500 से भी ज्यादा ग्रन्थ लिखे। जिसमें से केवल 30 ही उपलब्ध हो सके है।
Arastu ने राजनीति पर “पॉलटिक्स” नाम की किताब लिखी, नीतिशास्त्र पर “एथिक्स” , विज्ञान पर “फिजिक्स” औऱ जीव- जंतुओं पर “हिस्ट्री ऑफ एनीमिया” नाम की पुस्तकें लिखी।

अरस्तु की महानता और विचार
सम्भोग करने के आश्चर्यजनक फायदे जीवन आपको लंबे समय तक जीवित रखता है

पश्चात दर्शन की आधारशिला…

अरस्तू को ही जीव विज्ञान का जनक कहते है।
आज जो विषयों के अंग्रेजी नाम हैं वे अरस्तू की किताबों के शीर्षक से प्रेरित है।
पश्चात दर्शन की आधारशिला रखने के श्रेय सुकरात, प्लूटो और अरस्तू को जाता है।
इन्ही तीनों को पाश्चत्य संस्कृति का जनक कहते है।

पाश्चत्य दर्शन हर घटना या वस्तु के पीछे ठोस सबूत की मांग करता है।
अगर मैं यह कहूँ की यह ईश्वर के अस्तित्व को चुनौती देता है तो गलत नहीं होगा।
आधुनिक विज्ञान पश्चात दर्शन का उम्दा उदाहरण है।

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अरस्तु के महान व् अनमोल विचार जो आज भी प्रेरणादायक है…
  • दोस्त बनाना जल्दबाजी का काम है लेकिन दोस्ती धीरे-धीरे पकने वाला फल है।
  • अगर औरत नहीं होती तो इस दुनिया की सारी दौलत बेमानी होती।
  • एक निश्चित बिंदु के बाद, पैसे का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
  • किसी मनुष्य का स्वभाव ही उसे विश्वसनीय बनाता है, ना कि उसकी सम्पत्ति।
  • हमारा जीवन तभी सार्थक है, जब हम अपने सभी लक्ष्य प्राप्ति के लिये प्रयास करते है और उन्हें प्राप्त भी कर लेते है।
  • दोस्तों के बिना कोई भी जीना नहीं चाहेगा, चाहे उसके पास बाकी सब कुछ हो।
सूर्य नमस्कार करने के फायदे
  • मित्र का सम्मान करो, पीठ पीछे उसकी प्रशंसा करो, और आवश्यकता पड़ने पर उसकी सहायता करो।
  • मनुष्य स्वभाव से एक राजनीतिक जानवर है।
  • किसी काम की अच्छी शुरुआत से ही वह काम आधा पूरा हो जाता है।
  • कोई भी उस व्यक्ति से प्रेम नहीं करता जिससे वो डरता है।
  • बुरे व्यक्ति पश्चाताप से भरे होते हैं।
  • डर बुराई की अपेक्षा से उत्पन्न होने वाला दर्द है।
विटामिन और मिनरल्स आपको अवश्य खाने चाहिए
  • शिक्षा की जड़ कड़वी हैं पर उसके फल मीठे हैं।
  • जो सभी का मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता है।
  • खुशी हम पर निर्भर करती है।
  • संकोच युवाओं के लिए एक आभूषण है, लेकिन बड़ी उम्र के लोगों के लिए धिक्कार।
  • मनुष्य प्राकृतिक रूप से ज्ञान कि इच्छा रखता है।
  • मनुष्य के सभी कार्य इन सातों में से किसी एक या अधिक वजहों से होते हैं: मौका, प्रकृति, मजबूरी, आदत, कारण, जुनून, इच्छा।
दिल के बारे में कुछ रोचक जानकारी
  • चरित्र को हम अपनी बात मनवाने का सबसे प्रभावी माध्यम कह सकते हैं।
  • जो व्यक्ति सबका मित्र है वह किसी का भी मित्र नहीं नहीं है।
  • सभी भुगतान युक्त नौकरियाँ दिमाग को अवशोषित और अयोग्य बनाती हैं।
  • प्रकृति की सभी चीजों में कुछ ना कुछ अद्रुत है।
  • आलोचना से बचने का एक ही तरीका है, कुछ मत करो, कुछ मत कहो और कुछ मत बनों।
संगीत का महत्त्व

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