कोरोना वायरस फैलने के मुख्य कारण और महामारी का रूप कैसे लिया?
कोरोना वायरस पर चिंता प्रकट करते हुए जिनेवा में डब्ल्यूएचओ (WHO) के महानिदेशक ट्रेडोस अधनोम घेब्येसू (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने चीन की तारीफ करते हुए कहा था,
कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग (Xi Jinping) खुद इस महामारी की रोकथाम के लिए बनाई गई समिति का नेतृत्व कर रहे हैं।इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि चीनी राष्‍ट्रपति के इस कदम से प्रेरित होकर सरकार और पूरे समाज ने इस महामारी की रोकथाम को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए सरकार के साथ मिलकर काम किया,
जिससे चीन ने सफलतापूर्वक इस वायरस को फैलने से रोका।

कुछ बुद्ध जीवियों का मानना है की कोरोना वायरस एक जेनेटिकली इंजीनियर्ड वायरस है लेकिन इसका कोई भी प्रमाण नहीं है।

कोरोना वायरस फैलने के कारण…

ऐसा माना गया कि चीन के वुहान शहर जो कि समुद्र के किनारे बसा हुआ है और वहां के एक समुद्री जीवों के कच्चे मांस का बाजार है।
जहां पर मछलियों और पक्षियों सहित जीवित और मृत जानवरों को बेचा जाता है।
इस तरह के बाजार जानवरों से मनुष्य में आने वाले वायरस का एक बहुत बड़ा खतरा पैदा करते हैं।
ऐसे मांस के बाजारों में स्वच्छता बनाए रखना बहुत ही मुश्किल होता है।
यहां पर जीवित जानवरों को रखा जाता है और कसाई भी होते हैं,
तो यह बाजार आमतौर पर बहुत ही घने और गंदगी से भरे हुए होते हैं।
कोरोना वायरस फैलने के कारण हो सकते है।

कोरोना वायरस से बचने के लिए बहुत महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक उपाय आपकी जिंदगी के लिए

प्रारंभिक तौर पर ऐसा माना गया कि चीन वुहान शहर के इसी बाजार से कॉरोना की उत्पत्ति हुई,
लेकिन 25 जनवरी 2020 को सामने आए एक अध्ययन में कहा गया कि कोरोना वायरस के कारण
जिस पहले व्यक्ति की मृत्यु 1 दिसंबर 2019 को हुई, उसका इस प्रकार के बाजार से कोई संबंध नहीं था ।

कोरोना वायरस फैलने के कारण का मूल स्रोत चमगादड़ को ही माना गया है।
कोरोना वायरस फैलने के कारण 2017में नागालेंड से वुहान इंस्टीट्युट यह वायरस चीन लेकर गया था, और फिर वहां से "जाने अनजाने" में यह पूरी दुनिया में फैला।
2017 में नागालेंड से वुहान इंस्टीट्युट यह वायरस चीन लेकर गया था, और फिर वहां से “जाने अनजाने” में यह पूरी दुनिया में फैला।

नागालैंड (भारत) से वुहान (चीन) इंस्टीट्युट यह वायरस कैसे पहुंचा???

सूत्रों से मिली रिपोर्ट ने साबित किया है कि, 2017 में वुहान इंस्टीट्युट, टाटा इंस्टीट्युट ऑफ़ रिसर्च एवं मेलिंडा फाउन्डेशन ने मिलकर नागालैंड के चमगादड़ो पर एक रिसर्च की थी।
रिसर्च का विषय था – चमगादड़ इबोला, सार्स, रैबीज आदि वायरस के दूत कैसे है।
और चमगादड़ो की घनी आबादी के बावजूद नागालैंड में इन वायरस जनित रोगों का इतिहास क्यों नहीं मिलता है।
उन्होंने इसके लिए चमगादड़ो को पकड़ने वाले लोगो के खून के नमूने भी लिए और वे अपने साथ में कई चमगादड़ भी साथ में ले गए।
2019 में मेलिंडा फाउन्डेशन ने इस बारे में किये गए अध्ययनों को प्रकाशित किया।
कोरोना सार्स का ही एक वर्जन है।
इसी तथ्य को कोरोना वायरस फैलने के कारण का मुख्य स्त्रोत माना जा रहा है।

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कोविड-19 बनाम इबूप्रोफेन

इंडियन गवर्नमेंट ने अब इस पर जाँच करने के आदेश दिए है कि बिना अनुमति के ये लोग भारत से चमगादड़ कैसे लेकर गए।

तो यह बात साफ़ है कि वुहान रिसर्च इंस्टीट्युट नागालैंड से ले जाए गए चमगादड़ो पर सार्स, इबोला, कोरोना आदि वायरसो से सम्बंधित रिसर्च कर रहा था।
इस प्रकरण में कुछ भी संदिग्ध नहीं है, क्योंकि बीमारियों पर रिसर्च करने वाले विभिन्न संस्थान एवं फार्मास्युटिकल कम्पनियां इस तरह के शोध करती रहती है।
यहाँ गड़बड़ सिर्फ इतनी है कि, वे भारत में आकर ये चमगादड़ लेकर चले गये।
भारत सरकार अब जांच कर रही है कि वे लोग किसकी अनुमति से चमगादड़ लेकर गए थे।

वुहान इंस्टीट्युट से कोरोना वायरस फैलने के कारण, इसे लेकर दो संभावनाएं है…

वुहान के करीब एक कच्चे मांस मंडी है, और ज्यादातर प्राथमिक रोगी इस इलाके के आस पास से थे।
तो यह माना जा रहा है कि चमगादड़ के सूप वगेरह से यह वायरस मानव शरीर में चला गया और फिर फैलने लगा।
कोरोना का दूत ये चमगादड़ वहां कैसे आयें इस बारे में पक्के तौर पर कुछ पता नहीं।
वुहान इंस्टीट्युट के 2 शोध कर्ता भी कोरोना से ग्रस्त हुए है।
यह भी सम्भावना है कि शोध के दौरान ये लोग इससे संक्रमित हो गए हो और फिर उनसे यह अन्य में फैल गया हो।

सम्भावना भी हो सकती है, जो कि षड्यंत्र (Conspiracy) होने और ना होने की सीमा रेखा पर खड़ी है।
कुछ लोगो का मानना है कि चाइना ने इसे लैब में तैयार किया और यह एक जैविक हथियार है।

  • मेरे व्यक्तिगत विचार में ऐसा होना बहुत दूर की कड़ी है।
  • इस तरह के वायरस को लैब में नहीं बनाया जा सकता।
  • वैसे यह मानने वाली बात है या नहीं।
  • जिसे जो मानना है, मान सकता है।
  • अपनी सोच को रखने के लिए कोई सबूत की जरूरत तो होती नहीं है।
  • यह सब तर्क पर चलता है।

ऐसा भी कहा जा रहा है कि,
यह प्रकृति जन्य वायरस है और सुरक्षा मानक कमजोर होने के कारण वुहान की लैब से लीक हो गया है।
किन्तु चीन का दावा है कि वुहान इंस्टीट्युट की लैब के सुरक्षा मानक फोर्थ स्तर के है।
वहां से वायरस का इस तरह लीक होना मुमकिन नहीं है।

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यह भी हो सकता है कि,
यह प्रकृति जन्य वायरस है,
और चीन ने इसे वुहान लैब से जानबूझकर फैलाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि,
यदि चीन ने ऐसा किया है तो इसके पीछे वजह पैसा या जैविक हथियार होना नहीं है।
इसकी वजह युद्ध हो सकती है।

कोरोना वायरस फैलने के कारण और महामारी का रूप कैसे लिया

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और यूनाइटेड किंग्डम ने पिछले 6 साल से युद्ध की जितनी तैयारी की है।
उनकी वह सब उम्मीदें मिट्टी हो गयी है।
मतलब कम से कम अगले 2–3 वर्षो तक अब अमेरिका-ब्रिटेन को युद्ध की दिशा में काम करने की फुर्सत नहीं मिलेगी।
उन्हें अब इसे फिर ज़ीरो से शुरू करना होगा।
भारत में भी CAA+NRC पर किया गया सारा निवेश कचरा हो चुका है।

युद्ध से बचने के लिए क्या चीन ने कोरोना वायरस को खुद फैलाया है ?

अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
वक्त गुजरने के साथ शायद और भी परतें खुलेंगी जिससे तस्वीर और साफ़ हो जाएगी।
लेकिन जिस स्तर का युद्ध चीन को अमेरिका से लड़ना है।
उस युद्ध को टालने के लिए यदि चीन को अपने 2-4 लाख वृद्ध व्यक्तियों की कुर्बानी देनी पड़ती है तो यह बहुत छोटी कीमत है।
और इसीलिए चीन को युद्ध और कोरोना वायरस फैलने के कारण में से एक चुनना हो तो चीन कोरोना को चुनेगा।
क्योंकि युद्ध में चीन पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगा,
और दक्षिण एशिया के अन्य देश भी इस तबाही की चपेट में आकर तबाह हो जायेंगे।

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अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन इतना तय है कि कोरोना में सिर्फ चिकित्सीय आयाम नहीं है।
यह वैश्विक राजनीती को बहुत गहराई तक जाकर प्रभावित करने वाला है।
कोरोना जैसा वायरस अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस आदि को चीन की तुलना में कई गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा। क्योंकि अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस की प्रशासनिक व्यवस्था कोरोना जैसी चुनौती से निपटने में चीन के मुकाबले पिछड़ी हुई है।
और शायद जल्दी ही यह बात निकलकर सामने आ जायेगी।

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