प्यार भरी शायरी महान शायरों की कलम से लिखी गयी कुछ महान रचनाएँ जो समय के साथ-साथ जरूरत के मुताबिक उनका उपयोग करते है | यदि हमे जवानी में प्यार हो गया तो हम अपने महबूब को शायरी के माध्यम से प्यार का इज़हार करते है| यदि आपका प्रियतम दूर हो गया या याद नहीं करता तो प्यार भरी शायरी के माध्यम से शिकवा करते है | यदि कोई छोड़ गया तो प्यार भरी शायरी के माध्यम से ताने देते है इन सबके बावजूद भी आशिक़ों की कोशिश यही होती है की उन्हें उनका महबूब मिले जाये | इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की वो किस आयु में है जवानी हो या बुढ़ापा, दिल कभी बूढा नहीं होता और प्यार कभी मरता नहीं |

सच्चा प्यार करने वालो के शरीर मरते है उनकी आत्मा नहीं प्यार आत्मा से होता है ज़िस्म से नहीं ,ज़िस्म की भूख होती है जब भूख मिट गयी तो वो प्यार भी नौ दो ग्यारह हो जाता है| इसलिए दोस्तों प्यार बन्दगी है , एहसास है , फ़िक्र है , स्नेह है , तपस्या है इस को यूँ ही बदनाम न करे यदि ज़िस्म की भूख है ज़िस्म की जरूरत समझकर सम्भोग करो लेकिन प्यार को बदनाम न करो ,प्यार रब की पूजा है और प्यार का सम्मान करो . दोस्तों हम लेकर आए है महान शायरों की कुछ महान प्यार भरी शायरी …..

प्यार भरी शायरी

प्यार भरी शायरी महबूब के नाम..

शहर में क्यूँ मेरी पहचान ही बाकी ना रही,
इस खराबे को तो आबाद भी ख़ुद मैने किया है.!!

गा़लिब बुरा ना मान जो वाइज बुरा कहे,
ऐसा भी कोई है के सब अच्छा कहें जिसे.!!

की वफ़ा हम से तो ग़ैर इसको जफा कहते हैं,
होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं.!!

पिला दे ओक से साकी जो हम से नफरत है,
प्याला गर नहीं देता ना दे शराब तो दे.!!

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक,
कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होते तक.!!

हमने माना कि तगाफुल न करोगे लेकिन,
ख़ाक हो जाएंगे हम तुम को ख़बर होते तक.!!

रही न ताकत-ऐ-गुफ्तार और अगर हो भी,
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है.!!

बना है शह का मुसाहिब, फिरे है इतराता,
वर्ना शहर में “गालिब” की आबरू क्या है.!!

ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं,
कभी सबा को, कभी नामाबर को देखते हैं.!!

बिछड़ते वक़्त किसी आँख में जो आता है,
तमाम उम्र वो आँसू बहूत रुलाता है !!

इश्क़ उदासी के पैगाम तो लाता रहता है दिन रात,
लेकिन हमको खुश रहने की आदत बहुत ज़ियादा.!!

सुना करो सुबह ओ शाम कड़वी कसीली बातें,
कि अब यही जायके ज़बानों में रह गए हैं.!!

किस काम की रही ये दिखावे की जिंदगी,
वादे किए किसी से, गुजरे किसी के साथ.!!

खामोशी अच्छी नहीं इन्कार होना चाहिए,
ये तमाशा अब सर-ऐ-बाजार होना चाहिए.!!


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