विश्व के महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का कहना था कि “मैं अभी और जीना चाहता हूँ“।
ऐसा उन्होंने अपने 70 वे जन्म दिन को मनाते हुए कहा था।
उनके द्वारा बोले गए यह शब्द सुनकर दुनिया एक पल के लिए अचंभित हो गयी थी।
मैंने अपनी 38 बर्ष की आयु तक बहुत सारे बुद्धिजीविओं के जीवन और उनकी उपलब्धियों के बारे पढ़ा और सुना है।

लेकिन महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग जैसा दृढ़ निश्चय और प्रतिभाशाली वैज्ञानिक सदियों बाद पैदा होता है।
उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें ब्रिटिश सरकार ने कमांडर ऑफ द ऑर्डर की उपाधि दी,
तो यूएस प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ़्रीडम से भी नवाजा गया।
ऐसे में आइए हम आपको उनके जीवन के कुछ अन छुए पहलुओं के बारे में बताएं।

तो आईये आज हम ऐसे महान वैज्ञानिक की बात करते हैं जिन्होंने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया।

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग
महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का जन्म…

स्टीफ़न हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 को ऑक्सफोर्ड में हुआ था।
इनके पिता का नाम फ्रैंक और माता का नाम इसाबेल एलेन था।
स्टीफन हॉकिंग और गलीलियो गलीली की जन्म तरीक एक ही है।
बचपन से ही हॉकिंग बड़े बुद्धि मान थे।
उनके वक्तव्य ऐसे थे जो लोगो को चौंका देते थे।
हाकिंग को बचपन से लोग उन्हें अल्बर्ट आइंस्टीन कह के बुलाते थे।
जब हॉकिंग पैदा होने वाले थे तब परिवार लंदन में था।
लेकिन दूसरे युद्ध के कारण वो ओक्सफ़ोर्ड में आकर बस गये थे।
स्टीफन जब आठ वर्ष के थे तब उनके परिवार वाले सेंट अल्बान में आकर रहने लगे।

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हॉकिंग की शिक्षा और संस्थान…

सेंट अल्बान के ही एक स्कूल में स्टीफन का दाखिला करवा दिया गया।
हाकिंग पिता उन्हें एक डॉक्टर के रूप में देखना चाहते थे।
लेकिन उनको गणित विषय में रुचि थी।
अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद स्टीफन ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाख़िला लिया और यहां पर इन्होंने भौतिकी (Physics) विषय पर अध्ययन किया।
ऐसा भी कहा जाता है कि स्टीफन को गणित विषय में रुचि थी और वो इसी विषय में अपनी पढ़ाई करना चाहते थे।
लेकिन उस समय ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में गणित विषय नहीं हुआ करता था।
जिसके कारण उन्हें भौतिकी विषय को चुनना पड़ा।
फिजिक्स सब्जेक्ट में फर्स्ट पोसिशन में डिग्री हासिल करने बाद इन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी आगे की पढ़ाई की।
सन 1962 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड मैथेमैटिक्स एंड थ्योरिटिकल फिजिकल (डीएएमटीपी) में इन्होंने ब्रह्माण्ड विज्ञान पर अनुसंधान किया।

सन 1963 में एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस का अटैक…

21 साल की आयु में स्टीफन हॉकिंग छुट्टी मनाने घर पर आए हुए थे।
एक दिन जब वह सीढ़ियों से उतर रहे थे तब उनको बेहोशी का अहसास हुआ और वह सीढ़ियों से गिर गए।
उन्हें तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया।
डॉक्टर ने यह कह कर आश्वासन दे दिया कि ये कमज़ोरी के कारण हुआ है।
लेकिन बार बार ऐसा होने लगा तब उनको बड़े डॉक्टरों के पास ले जाया गया।
उच्च श्रेणी के डॉक्टरों से पता चला कि वो अंजान और कभी ठीक ना होने वाली बीमारी से ग्रस्त है।
जिस बीमारी का नाम है एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS) )।
इस बीमारी के कारण शरीर के हिस्से धीरे-धीरे कार्य करना बंद कर देते हैं और इस बीमारी का कोई भी इलाज नहीं है।

इस बीमारी का आम इंसान पर प्रवाह…

ज्यादातर ALS पीड़ितों को उनकी बीमारी का 50 साल की उम्र के बाद ही चलता है।
और उसके बाद वो सिर्फ 2 से 3 साल तक ही अपनी ज़िन्दगी जी पाते हैं।
लेकिन जिनको इस बीमारी का पता पहले चल जाता है उनका शरीर इससे लड़ता है और वो लम्बी आयु तक टिक पाते हैं।
स्टीफेन हॉकिंग के केस में भी यही हुआ।
बल्कि इस बीमारी ने उनकी क्रिएटिविटी और सोचने की क्षमता को और ज्यादा बढ़ा दिया।
एक बार उन्होंने कहा भी था कि “मेरे हाथों ने जब काम करना बंद कर दिया तो मैं अपने दिमाग के जरिए ब्रह्मांड में घूमने लगा, मैं उन तरीकों की कल्पना करने लगा जिस पर ये काम करता है.”

हाकिंग के माता पिता से डॉक्टर्स ने कहा कि इन्हे घर ले जाईये और इनकी सेवा कीजिये।
क्यूंकि डॉक्टर ने कहा कि हॉकिंग मात्र दो साल के मेहमान है इसे ज्यादा वो नही जी पाएंगे हैं।
लेकिन हॉकिग ने अपनी इच्छा शक्ति पर पकड़ बना रखी थी और
उन्होंने कहा में 10 ,20 या 30 नहीं पूरे पचास साल जीऊंगा।
आज दुनिया इसकी साक्षी (ग्वाह) है कि जो हॉकिंग ने कहा था वो कर दिखाया।
जिस वक्त स्टीफन को इस बीमारी का पता चला था उस वक्त वो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई कर रहे थे।
लेकिन उन्होंने अपनी इस बीमारी को अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया।
बीमार होने के बावजूद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को पूरा किया और साल 1965 में उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की।

स्टीफन हॉकिंग का वैवाहिक जीवन…

जब स्टीफ़न को अपनी बीमारी के बारे में पता चला उसी साल उन्होंने अपनी प्रेमिका जेन वाइल्ड से साथ विवाह कर लिया।
हॉकिंग के इस बुरे वक्त में जेन ने उनका साथ दिया और साल 1965 में इन्होंने शादी कर ली।
उस वक्त उनका दाहिना हिंसा पूरी तरह से खराब हो चुका था और वो स्टिक की हेल्प से चलते थे।
जेन और हॉंकिग ने मिलकर तीन बच्चों को इस सुनहरी दुनिया में आने का मौका दिया।
उनकी वच्चों के नाम रॉबर्ट, लुसी और तीमुथियस है।
हॉकिंग की ये शादी 30 सालों तक चली थी और साल 1995 में जेन और हॉकिंग ने तलाक ले लिया था।

स्टीफन हॉकिंग ने साल 1965 में जेन वाइल्ड शादी कर ली

जेन का तलाक लेने का कारण था की वो एक धार्मिक स्त्री थी जबकि हॉकिंग हर वक्त भगवान के अस्तित्व को चुनौती देते थे।
जिस के कारण उनकी काफी आलोचना भी हुई।
लेकिन उन पर ध्यान दिये बिना हॉकिंग अपनी खोजों पर आगे बढ़ते गए।
तलाक लेने के बाद हॉकिंग ने ऐलेन मेसन(Elaine Mason) से विवाह कर लिया था,
और साल 1995 में हुई ये शादी साल 2016 तक ही चली।

स्टीफन हॉकिंग दूसरी पत्नी ऐलेन मेसन के साथ,साल 1995 में हुई ये शादी साल 2016 तक ही चली।

वैज्ञानिक के रूप में स्टीफन हॉकिंग का करियर…

कैम्ब्रिज से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भी हॉकिंग इस कॉलेज से जुड़े रहे और इन्होंने एक शोधकर्ता के रूप में यहां कार्य किया।
इन्होंने साल 1972 में डीएएमटीपी में बतौर एक सहायक शोधकर्ता अपनी सेवाएं दी और इसी दौरान इन्होंने अपनी पहली अकैडमिक पुस्तक, ‘द लाज स्केल स्ट्रक्चर ऑफ स्पेस-टाइम’ लिखी थी।
यहां पर कुछ समय तक कार्य करने के बाद साल 1974 में इन्हें रॉयल सोसायटी (फैलोशिप) में शामिल किया गया।

जिसके बाद इन्होंने साल 1975 में डीएएमटीपी में बतौर गुरुत्वाकर्षण भौतिकी रीडर के तौर पर भी कार्य किया,
और साल 1977 में गुरुत्वाकर्षण भौतिकी के प्रोफेसर के रूप में भी यहां पर अपनी सेवाएं दी।
वहीं इनके कार्य को देखते हुए साल 1979 में इन्हें कैम्ब्रिज में गणित के लुकासियन प्रोफेसर (Lucasian Professor) नियुक्त किया गया था,
जो कि दुनिया में सबसे प्रसिद्ध अकैडमी पद है और इस पद पर उन्होंने साल 2006 तक कार्य किया।

स्टीफन हॉकिंग की उपलब्धियां…

डॉ स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाले बुनियादी कानून पर कई शोध किए हैं।
हॉकिंग ने अपने साथी रोजर पेनरोस के साथ मिलकर एक शोध किया था,
और दुनिया को बताया था अंतरिक्ष और समय, ब्रह्मांड के जन्म के साथ शुरू हुए हैं और ब्लैक होल के भीतर समाप्त हो जायेंगे।
आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी और क्वांटम थ्योरी का प्रयोग करके, हॉकिंग ने ये भी निर्धारित किया कि ब्लैक होल पूरी तरह से शांत नहीं हैं बल्कि उत्सर्जन विकिरण (emit radiation) करता है।

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इसके अलावा स्टीफन हॉकिंग ने ये भी प्रस्ताव किया था कि ब्रह्मांड की कोई सीमा नहीं है और विज्ञान की मदद से ये भी पता किया जा सकता है कि ब्रह्माण्ड की शुरूआत कब हुई थी और कैसे हुई थी।
स्टीफन हॉकिंग द्वारा लिखी गई सबसे पहली किताब का नाम ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ था।
ये किताब बिग बैंग और ब्लैक होल के विषय पर आधारित थी और साल 1988 में प्रकाशित हुई ये किताब 40 भाषाओं में उपलब्ध है।
जिसने दुनिया भर के विज्ञान जगत में तहलका मचा दिया था।

स्टीफन हॉकिंग एक विवादित वैज्ञानिक के रूप में…

हॉकिंग ने विज्ञान की नज़र से ही भगवान, पृथ्वी पर इंसानों का अंत और परग्रहियों के अस्तित्व पर अपनी बात पूरी तरह खुलकर स्पष्ट कही थी।
स्टीफन हॉकिंग का मानना था कि भगवान ने ब्रह्मांड की रचना नहीं की है।
दी ग्रैंड डिजाइन नाम की किताब में उन्होंने लिखा था कि ब्रह्मांड की रचना अपने आप हुई है।
हॉकिंग ब्रह्मांड की रचना को अपने आप घटित हुई, घटना मानते थे।
हालांकि, प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन मानते थे कि इस सृष्टि को बनाने वाला अवश्य ही कोई रचियता है,
अन्यथा इतनी जटिल रचना पैदा नहीं हो सकती।
हॉकिंग का कहना था कि ब्रह्मांड में गुरुत्वाकर्षण जैसी शक्ति की वजह से नई रचनाएं हो सकती हैं।
इसके लिए ईश्वर जैसी किसी शक्ति की सहायता की जरूरत नहीं पड़ती है।

उकना कहना , “गुरुत्वाकर्षण वो नियम है जिसकी वजह से ब्रह्मांड अपने आपको शून्य से एक बार फिर शुरू कर सकता है और करेगा भी, ये अचानक होने वाली खगोलीय घटनाएँ हमारे अस्तित्व के लिए ज़िम्मेदार हैं।
ऐसे में ब्रह्मांड को चलाने के लिए भगवान की ज़रूरत नहीं है।
हालांकि हॉकिंग को इस बयान के लिए ईसाई धर्म गुरुओं की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा था।

स्टीफन हॉकिंग ने कहा था कि मुझे इस बात का पूरा अहसास है कि ना तो कोई स्वर्ग है और ना ही मरने के बाद कोई जीवन। मेरा मानना है कि मरने के बाद जीवन है- ऐसा सोचना सिर्फ आपका खुश नुमा विचार ही हो सकता है।
हॉकिंग ने एक रिसर्च के आधार पर तर्क दिया था कि हमारा सौर मंडल अनूठा नहीं है,
बल्कि कई सूरज हैं जिनके चारों ओर ग्रह चक्कर काटते हैं वैसे ही जैसे पृथ्वी सूर्य का चक्कर काटती है।

ब्लैक होल और बिग बैंग…

ब्लैक होल और बिग बैंग जैसी खगोलीय घटनाओं पर उनके शोध ने दुनिया को समझने में अन्य वैज्ञानिकों की मदद की है।

इसके अलावा आपको बता दे कि स्टीफ़न हॉकिंग ने पृथ्वी पर इंसानियत के भविष्य को लेकर चौंकाने वाला ऐलान किया था।
स्टीफ़न हॉकिंग ने कहा था, “मुझे विश्वास है कि इंसानों को अपने अंत से बचने के लिए पृथ्वी छोड़कर किसी दूसरे ग्रह को अपनाना चाहिए।
और इंसानों को अपना वजूद बचाने के लिए अगले 100 सालों में वो तैयारी पूरी करनी चाहिए जिससे पृथ्वी को छोड़ा जा सके।
“स्टीफ़न हॉकिंग ने दुनिया के सामने ब्रह्मांड में एलियन के अस्तित्व को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी।
उन्होंने कहा था कि “मैं सोचता हूं कि एलियन का पृथ्वी पर आवागमन अवश्य होगा और शायद हमारे लिए ये अच्छा नहीं होगा।”
क्योंकि जब कोलंबस ने अमेरिका की खोज की और दुनिया का ध्यान इस और गया तो इससे वहाँ पर रहने वाले आदिवासी, रेड इंडियन के लिए कोई फायदे की बात नही थी।

विश्व इतिहास का सबसे क्रूर शासक
स्टीफन हॉकिंग के अनमोल विचार…
  • “हमें सबसे अधिक महत्व का काम करने का प्रयास करना चाहिए।”
  • “मैं मौत से नहीं डरता, लेकिन मुझे मरने की कोई जल्दी नहीं है। मेरे पास पहले करने के लिए इतना कुछ है।”
  • “मेरे पास इतना कुछ है जो मैं करना चाहता हूँ। मुझे समय बर्बाद करने से नफरत है।”
  • “चाहे ज़िदगी जितनी भी मुश्किल लगे, आप हमेशा कुछ ना कुछ कर सकते हैं और सफल हो सकते हैं।”
  • “यदि आप हमेशा गुस्सा या शिकायत करते हैं तो लोगों के पास आपके लिए समय नहीं रहेगा।”
  • “मैंने देखा है वो लोग भी जो ये कहते हैं कि सब कुछ पहले से तय है , और हम उसे बदलने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते, वे भी सड़क पार करने से पहले देखते हैं।”

हॉकिंग की मृत्यु…

अपने आत्मविश्वास के बल पर स्टीफन 76 साल तक जिन्दा रहे।
स्टीफन हॉकिंग की परिवार के प्रवक्ता के मुताबिक, 14 मार्च 2018 की सुबह अपने घर कैम्ब्रिज में ‘हॉकिंग की मृत्यु हो गई थी।
इस प्रकार एक महान वैज्ञानिक अपनी सारी उम्र इंसानियत के लिए कार्य करता हुआ हम सब को अलविदा कह गया।

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