किस्मत को दोष ना दे बन्दे तू भी औरो जैसा है-
क्या हम अपने भाग्य या किस्मत बदल सकते है ?
क्या हम अपने पक्ष में काम करने के लिए प्रेरित कर सकते है?
तो इसका जबाब है हां, मैं अपनी किस्मत का विधाता खुद हूँ.
मेरी माँ ने मुझे जन्म दिया कर्म नहीं, कर्म मुझे खुद करना होगा.
यदि धीरू भाई अम्बानी घर बैठे रहते और किस्मत का इंतजार करते तो आज उन्हें कोई नहीं जनता ना आप और ना हम.
किस्मत और भाग्य का डर दिखाकर चंद लोग अपना घर चलाते है और कुछ नहीं.

किस्मत चमक सकती है हिम्मत वालों की|
बुझी शमा भी जल सकती है,तूफानों से कश्ती भी निकल सकती है, हो के मायूस यूँ ना अपने इरादे बदल,तेरी किस्मत कभी भी बदल सकती है।
किस्मत चमक सकती है हिम्मत वालों की
जब सारी दुनिया कहती है हार मान लो,तब दिल धीरे से कहता है कि एक बार और कोशिस कर लो, क्यूंकि आप ही इस काम को कर सकते हो|
जिंदगी में इतनी तेजी से आगे दौड़ो कि लोगो कि
बुराई के धागे आपके पैरों में ही अटक कर टूट जायें|
जीत निश्चित हो तो कायर भी जंग लड़ जाते है बहादुर तो वो
लोग है जो हार का पता होने के बाद भी लड़ना नहीं छोड़ते|
टूटी कलम और औरों की जलन,
खुद का भाग्य लिखने नहीं देती!!
अपने होंसलो को ये मत बताओ कि तुम्हारी परेशानी कितनी बड़ी है,
बल्कि अपनी परेशानी को ये बताओ कि तुम्हारा होंसला कितना बड़ा है|
मत सोच कि तेरा इरादा क्यों पूरा नहीं होता, मेहनती लोगों का कभी इरादा अधूरा नहीं रहता,
जिस इंसान की सोच (कर्म )अच्छी होती है, उसके जीवन में कभी अँधेरा नहीं रहता।
परिंदों को मंज़िल मिलेगी यक़ीनन, ये फैले हुए उनके पंख बोलते हैं,
वो लोग रहते हैं खामोश अक्सर,जमाने में ज़िनके हुनर बोलते हैं।
सीढियाँ उन्हें मुबारक हों, जिन्हे सिर्फ छत तक जाना है,
मेरी मंज़िल तो आसमान है,रास्ता मुझे खुद बनाना है।

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