लिवर की बीमारी के बहुत से कारण है, विशेषज्ञ की खास सलाह- लिवर को हम यकृत और जिगर के नाम से भी जानते हैं।
स्पंज जैसा नाजुक शरीर का यह अंग यदि खराब हो जाए तो पूरे शरीर की सेहत पर प्रवाह करता है।
लिवर की बीमारी को यदि समय पर न नियंत्रित किया जाये तो इसके परिणाम गंभीर समस्या का रूप ले सकते है।
लिवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण ऑर्गन है।
दिमाग के बाद लिवर शरीर का दूसरा सबसे बड़ा ठोस अंग है, जो बहुत सारे मुश्किल काम करता है।
लिवर हमारे शरीर में ऐसे सभी कामों को अंजाम देता है, जो अन्य अंगों की ठीक फंक्शनिंग के लिए जरूरी हैं।
आखिर लिवर की बीमारी के लक्षण क्या हैं और किस तरह इससे बचा जा सकता है| यही बता रहे मेदांता मेडिसिटी गुड़गांव के प्रसिद्ध लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. प्रशांत भांगी

लिवर की बीमारी के कारण-

अंतरराष्ट्रीय लिवर ट्रांसप्लांट सोसायटी के सदस्य डॉ. प्रशांत भांगी बताते हैं कि लिवर की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है।
तेजी से बदलती जीवनशैली और इस भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखते हैं|
अधिक तेल मसाले वाला भोजन और फ़ास्ट फ़ूड भी मुख्य कारण है|
70 फीसदी मामलों में यह हैपिटाइटिस, हैपि‍टाइटिस बी और सी की वजह से होती, लेकिन भारत में यह हैपिटाइटिस सी की वजह से ज्यादा होती है।
ज्यादा शराब पीने और लंबे समय तक शराब पीने की वजह से भी लिवर खराब हो जाता है।
30 फीसदी मामलों में लिवर की समस्या के पीछे हमारा रहन-सहन और खान-पान होता है।
बच्चों में यह बीमारी जीन और एंजाइम डिफेक्ट की वजह से होती है।

लीवर की बीमारी के लक्षण-

मुंह से बदबू आना
आँखों के नीचे काले निशान पड़ना
पेट में हमेशा दर्द रहना
खाने का सही से न पचना
स्किन पर सफ़ेद पड़ना (Liver spots)
पेशाब या मल गहरे रंग का होना आदि
वर्ष 2016 में श्रेष्ठ शोध पत्र के लिए वेनगार्ड अवॉर्ड से सम्मानित डॉ. भांगी कहते हैं कि शुरुआती दौर में ही ध्यान दिया जाए तो लिवर की बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है।
अंतिम स्थिति में तो दवाएं भी काम करना बंद कर देती हैं, ऐसी स्थिति में लिवर प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प होता है।
वे कहते हैं कि पैरों में सूजन, पेट में पानी का बनना, खून की उल्टी होना, शरीर में अंदरूनी तौर पर खून का बहना ऐसे लक्षण हैं, जो लिवर की बीमारी की तरफ इशारा करते हैं।

लीवर की खराबी से बचने के उपाय-

लीवर को स्वस्थ रखने के लिए हमारा पूरा स्वास्थ्य इसपर निर्भर करता है|
गोवा के राज्य स्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी रहे डॉ. प्रशांत बताते हैं कि खराब जीवनशैली के कारण व्यक्ति में फैटी लिवर (लिवर पर चर्बी का जमना) की समस्या पैदा होती है। यदि हम अपनी लाइफ स्टाइल सुधार लें सुबह-शाम दो-दो किलोमीटर पैदल चलें तो इस समस्या से निजात पा सकते हैं।
एल्कोहोल का सेवन ना करे तो बेहतर है
फास्ट फूड का सेवन कम करे
शाकाहारी भोजन का सेवन करें
तले-गले और मसालेदार भोजन से परहेज रखें
दर्दनिवारक दवाओं का उपयोग कम करें
नियमित एक्सरसाइज़ करें
तो लिवर स्वस्थ रहेगा और लिवर ट्रांसप्लांट की नौबत ही नहीं आएगी।

लीवर कैंसर के लक्षण-

यूरोपियन सोसायटी फॉर ऑर्गन ट्रांसप्लांट के सदस्य डॉ. भांगी कहते हैं कि 90 फीसदी मामलों में लिवर कैंसर खराब लिवर में ही होता है।
10 फीसदी मामले ही ऐसे होते हैं जब सामान्य लिवर में ट्‍यूमर आते हैं।
उनका कहना हैं कि लिवर बदलने से लिवर कैंसर का उपचार भी हो जाता है।
इस मामले में जागरूकता की भी जरूरत है ताकि लोगों में निराशा न आए।
फ्रांस में सुपर स्पेशियलिटी ट्रेनिंग में भाग लेने वाले डॉ. भांगी बताते हैं कि उन्हें वहां बहुत कुछ सीखने को मिला। उपचार के दौरान सही मरीज का चयन भी बहुत जरूरी होता है ताकि सही परिणाम मिल सकें।

लीवर कैंसर के प्रारंभिक लक्षण इस प्रकार है-
थकान होना, वजन घटना और उल्टी होना लिवर के खराब होने के संकेत हैं।
पीलिया कोई बीमारी नहीं है, यह वास्‍तव में एक चिन्‍ह् है कि आपका लिवर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। जब शरीर में बिल्‍रूयूबिन की मात्रा ज्‍यादा हो जाती है तो पीलिया हो जाता है।
यह लिवर कैंसर का पहला लक्षण है।
अगर इन सब बीमारियों ने आपको घेर लिया है तो लिवर कैंसर की जांच करा लीजिए।

सस्ते इलाज का ना होना-

तकनीक के साथ इलाज भी महंगा हुआ है, ऐसे में आम आदमी को सस्ता इलाज कैसे मिले?
इस सवाल के जवाब में डॉ. भांगी कहते हैं कि लिवर ट्रांसप्लांट में पहले भी 18 से 21 लाख खर्च होते थे, अब भी लगभग इतना ही खर्च होता है।
यदि एक आम आदमी इसकी गिरफत में जाये तो उसकी मौत निश्चित है|
लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी ज्यादातर कार्पोरेट अस्पतालों में ही होती है।
एम्स जैसे सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा मौजूद नहीं है।
सरकारी सहयोग के बिना सस्ता इलाज संभव नहीं है।
और सरकार आम इंसान की सहायता क्यों करेगी|

लीवर कैंसर का आधुनिक तकनीक से इलाज-

रेडियो तरंगों का इस्तेमाल कर एक लक्षित चिकित्सा से लिवर कैंसर का इलाज बेहतर तरीके से किया जा सकता है। यह चिकित्सा अन्य कोई भी शारीरिक नुकसान पहुंचाए बिना शरीर में कहीं भी लिवर कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकती है।
हिसाब से तय की जाती है रेडियो फ्रीक्वेंसी थेरेपी में मरीज के कैंसर के प्रकार और स्थिति के हिसाब से रेडियो फ्रीक्वेंसी तय की जाती है।
इसके लिए शोधकर्ताओं ने हाथ में पकड़ा जाने वाला एक उपकरण तैयार किया है।
यह कैंसर के हिसाब से फ्रीक्वेंसी छोड़ता है।
इस थेरेपी के जरिए शरीर में कैंसर के सेल्स व ट्यूमर को खत्म किया जाता है।
कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

क्या खाएं लिवर को स्वस्थ रखने के लिए-

क्या खाएं लिवर को स्वस्थ रखने के लिए
लिबर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि स्वस्थ जीवनशैली के साथ ही खानपान भी अच्छा होना चाहिए।
भोजन में अधिक से अधिक हरी सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए।
पालक, ब्रोकली, पत्तगोभी, सरसों, मूली के साथ ही अंकुरित मूंग, गेहूं आदि का भी प्रयोग किया जा सकता है।
भोजन में हमें लहसुन और अदरक का भी प्रयोग नियमित रूप से करना चाहिए।


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मानव शरीर 300 मिलियन कोशिकाएं प्रतिमिनट नष्ट 300 बिलियन नई कोशिका उत्पादित · October 2, 2019 at 5:50 pm

[…] हैं, उतने ही तीखे और काले हो जाते हैं। यह जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है और यहां तक कि […]

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