वायरस का कहर पूरी दुनिया मौत के साये के नीचे खड़ी है बेबस कि कब इस ख़तरनाक संक्रमण से लड़ने के लिए वेक्सीन तैयार होगी।
आज पैसों के ढेर है जिनके पास वो भी बेबस से नजर आ रहे हैं । एक छोटे से शहर से निकल कर विशालकाय रूप लेने वाले वायरस के फैलने के लिए अब चीनी सरकार और स्वास्थ्य प्रबंधकों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है,क्योंकि वायरस का कहर पूरी दुनिया झेल रही है.

वायरस का कहर

यदि पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स और मेडिकल प्रोफेशनल्स ने लोगों को सही समय पर आगाह किया होता तो शायद इस खतरनाक वायरस को फैलने से रोका जा सकता था।
एक हेल्थ एक्सपर्ट यंजहोंग हुआंग ने कहा, ‘स्थानीय हेल्थ डिपार्टमेंट की तरफ से लोगों को एलर्ट करने के लिए किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई।

आइये जानते है कि इस धरती के भगवान यानि हमारे विज्ञानिकों कि क्या राये है –

विज्ञानिकों का मानना है कि ये वायरस चीनी शहर वुहान के समुद्री जीवों को बेचने वाले बाज़ार से निकल कर आया है।
ये बाज़ार जंगली जीवों जैसे सांप, रैकून और साही अथवा अन्य दुर्लभ जानवरों के अवैध व्यापार के लिए चर्चित था।
इन जानवरों को पिंजरे में रखा जाता है और इनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों और दवाइयों के रूप में किया जाता है।
लेकिन ख़ूबे प्रांत पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से इस बाज़ार पर भी प्रतिबंध लग गया है।
चीन दुनिया में जंगली जानवरों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है जहां ये व्यापार वैध और अवैध ढंग से चलाया जाता है।

वायरस का कहर

क्या चीनी सामान छूने से कोरोना वायरस फैल सकता है?

बहुत लोग जानना चाहते हैं कि क्या चीन के वुहान या दूसरे हिस्से जो कि इस वायरस की चपेट में हैं,
वहां से निर्यातित माल को छूने से ये वायरस फैल सकता है?
लेकिन अब तक ऐसे कोई सबूत सामने नहीं आए हैं जिनके आधार पर ये सिद्ध हो सके,
कि वुहान या दूसरे संक्रमित इलाकों से आए सामान को छूने से वायरस फैल सकता है।
लेकिन साल 2003 में चीन ने सार्स नामक कोरोना वायरस का सामना किया था
जिसने दुनिया भर में 700 से ज़्यादा लोगों की जान ली थी।
सार्स के मामले में ये पाया गया था कि अगर आप किसी चीज़ या जगह को छूते हैं।
जहां पर संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से वायरस पहुंचा हो तो आप उस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।

लेकिन अब तक इस नोवेल कोरोना वायरस के मामले में ये बात सामने नहीं आई है।
अगर ये वायरस ऐसा करने में कामयाब भी होता है तब भी एक सवाल ये होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट एक बड़ी समस्या होगी।

वायरस का कहर

ज़ुकाम के वायरस-

ज़ुकाम के वायरस इंसानी शरीर के बाहर 24 घंटे तक ज़िंदा रहते हैं।
हालांकि कोरोना वायरस कई महीनों तक इंसानी शरीर के बाहर भी ज़िंदा रह सकता है।
लेकिन अब तक जो मामले आए हैं,
उनमें ये देखा गया है कि किसी व्यक्ति को इस वायरस से संक्रमित होने के लिए संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना होता है।

चीन ने लगाया प्रतिबंध-

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, इस वायरस के प्राथमिक स्रोत चमगादड़ हो सकते हैं।
ये भी कहा जा रहा है कि ये वायरस इंसानों में आने से पहले किसी अन्य जानवर में गया होगा,
जिसकी पहचान अब तक नहीं की जा सकी है।
चीन में कुछ जानवरों को उनके स्वाद की वजह से खाया जाता है।
वहीं, कुछ जानवरों का इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं में किया जाता है।
चीन के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे रेस्त्रां हैं जहां पर बैट सूप यानी चमगादड़ का सूप परोसा जाता है।

इन सूप के कटोरों में आपको एक साबुत चमगादड़ मिलता है।
कई सूपों में बाघ के अंडकोष और पाम सिवेट के शरीर के अंग शामिल होते हैं।
भुना हुआ कोबरा सांप, भालू के भुने हुए पंजे, बाघ की हड्डियों से बनी शराब जैसी डिश महंगे रेस्त्राओं में पाई जा सकती है।
जानवरों को बेचने वाले कुछ बाज़ारों में चूहे, बिल्लियां, सांप समेत कुछ दुर्लभ चिड़ियों की प्रजातियां भी बेची जाती हैं।
चीन में जानवरों के व्यापार पर जांच करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था से जुड़े एक इंवेस्टिगेटर बताते हैं, “चीन में ‘येवै’ का विचार (चीनी भाषा में इस शब्द का अनुवाद जंगली टेस्ट होता है) घर-घर में बोला जाने वाला टर्म है जो कि चीन में सांस्कृतिक रूप से एडवेंचर, साहस, खोजी प्रकृति और विशेषाधिकार को बताता है।”

जानवरों के अंगों से बनी पारंपरिक चीनी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर माना जाता है
कि जानवरों के अंगों में कई बीमारियां जैसे कि पुरुष नपुंसकता, आर्थराइटिस और गठिया जैसे रोगों को दूर करने की क्षमता होती है।

चाइना में इतने वायरस क्यों जन्म लेते हैं?

चीन का वुहान शहर की जिस फूड मार्केट को इस वायरस के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
उसमें 112 तरह के जानवरों का मीट बेचा जाता है।
सूत्रों के अनुसार,अलग-अलग जानवरों का सड़ा-गला मीट ही कोरोना वायरस की असली वजह है।
चीन में एक बड़ी आबादी जानवरों के बहुत ज्यादा संपर्क में रहती है।
कोरोना वायरस भी किसी जानवर से ही इंसान में पहुंचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये वायरस सांपों से इंसान में आया है। इस जैसा ही एक अन्य वायरस सार्स भी चीन में शुरू हुआ था और वह चमगादड़ों और सिवेट बिल्ली से आया था।

वायरस का कहर पूरी दुनिया मौत के साये के नीचे खड़ी है बेबस
वायरस का कहर

इस संक्रमण के शुरुआती मामलों के तार दक्षिणी चीन के सी-फूड होलसेल मार्केट तक पहुंचते हैं।
इन बाज़ारों में मुर्गों, चमगादड़ों के साथ-साथ सांप भी बेचे जाते हैं।

कोरोना वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड कितना है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, किसी भी वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड वो समय होता है जिस दौरान व्यक्ति वायरस से संक्रमित होता है,लेकिन उसके स्वास्थ्य पर उसका असर दिखाई नहीं देता है।

फिलहाल, इस वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड 2 से दस दिनों के बीच बताया जा रहा है। लेकिन ठीक आंकलन के लिए ज़्यादा जानकारी की ज़रूरत है।

किसी भी वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड समझना बेहद ज़रूरी होता है। डॉक्टर और सरकारें इसकी मदद से वायरस के प्रसार को रोक सकते हैं।

इसका मतलब ये हुआ कि अगर उन्हें इस बारे में पता हो तो वे ऐसे लोगों को आम आबादी से अलग कर सकते हैं जिनके वायरस से संक्रमित होने की आशंका होती है।

जानवरों की प्रजातियो के विलुप्त होने का ख़तरा-

चीन में पेंगोलिन जानवर के कवच की मांग ज़्यादा होने की वजह से चीन में ये जानवर लगभग विलुप्त हो चुका है।

अब दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी ये सबसे ज़्यादा शिकार किया जाने वाला जानवर बन चुका है।

चीनी दवाओं में गेंडे के सींग का अत्यधिक इस्तेमाल होता है और इस चलन की वजह से गेंडा भी एक संकटग्रस्त जानवर बन चुका है।

चीन में ये सब तब हो रहा है जबकि लोगों को पता है कि 70 फ़ीसदी नए वायरस जानवरों, विशेषत: जंगली जानवरों से आए हैं।

कोरोना वायरस ने एक बार फिर चीन में जंगली जानवरों के धड़ल्ले से चल रहे व्यापार को सबके सामने ला दिया है। वन्यजीव संरक्षण संस्थाए इसकी लगातार आलोचना करती हैं। क्योंकि इस व्यापार के चलते जानवरों की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं।

कोरोना वायरस फैलने के बाद चीनी सरकार ने वन्य जीवों के व्यापार पर फौरी तौर पर प्रतिबंध लगा दिया है ताकि इस वायरस को फैलने से रोका जा सके।

लेकिन वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाएं इस कोशिश में है कि इस मौक़े का इस्तेमाल इस व्यापार को पूरी तरह से रोकने में किया जाए।
क्या चीन वन्य जीव संरक्षकों की बात सुनेगा?

क्या कोरोना वायरस के संक्रमण से वन्यजीवों के अवैध व्यापार रोकने के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों को बल मिलेगा और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए पैदा होने वाले ख़तरों को टाला जा सकेगा?

नोवेल कोरोनावायरस से बचने के लिए उचित सावधानी ही आपका बचाव है

विशेषज्ञों की मानें तो ये बेहद चुनौती पूर्ण कार्य है और ऐसा होना लगभग असंभव जान पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, ख़तरनाक वायरस सार्स और मर्स भी चमगादड़ों से आए थे।

लेकिन वे भी इंसानों में आने से पहले सिवेट कैट और ऊंटों से होकर आए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोषण एवं खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़े डॉ। बेन इमबारेक ने बीबीसी को बताया, “हम उन वन्य जीवों की प्रजातियों के संपर्क और उनके प्राकृतिक आवास में पहुंच रहे हैं जिनका हमसे पहले कोई संबंध नहीं था। ऐसे में हम नई बीमारियों का सामना कर रहे हैं जो कि पहले इंसानों में नहीं देखी गई हैं। ये बीमारियों ज्ञात वायरसों, बैक्टीरिया और परजीवियों में भी नहीं देखी गई हैं।”

हाल में किया गया एक विश्लेषण बताता है कि ज़मीन पर चलने वाले हड्डीधारी वन्यजीवों की कुल 32 हज़ार प्रजातियों में से 20 फ़ीसदी प्रजातियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में वैध और अवैध ढंग से ख़रीदा-बेचा जा रहा है।

इसका मतलब ये हुआ कि स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसर्पों और उभयचरों की 5,500 से ज़्यादा प्रजातियों की ख़रीद-फरोख़्त जारी है। दुनिया में जानवरों का अवैध व्यापार 20 अरब डॉलर का है। और ये ड्रग्स, मानव तस्करी और नक़ली सामान के बाद चौथे नंबर पर आता है।

क्या ये ख़तरे की घंटी है?

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ने अपने बयान में कहा है, “इस स्वास्थ्य संकट को एक ख़तरे की घंटी के रूप में लिया जाना चाहिए ताकि संकटग्रस्त जानवरों को पालतू बनाने और उनके अंगों को खाद्य पदार्थों के रूप में और औषधीय गुणों के चलते उनके दोहन को रोका जा सके।”

मोहब्बत और भावनाओं की बेहतरीन शायरी

हालांकि, चीनी सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये प्रतिबंध फौरी तौर पर रहेगा।

चीन की तीन सरकारी संस्थाओं ने अपने संयुक्त बयान में कहा है, “सभी प्रजातियों के वन्य जीवों को पालने, एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने और बेचने पर इस घोषणा से लेकर राष्ट्रीय महामारी की स्थिति ख़त्म होने तक प्रतिबंध लगाया जाता है।”

चीन ने इसी तरह का प्रतिबंध साल 2002 में सार्स वायरस के फैलने पर लगाया था। लेकिन संरक्षको के मुताबिक़, इस बैन के कुछ महीनों बाद ही चीन में वन्य जीवों का व्यापार धड़ल्ले से होने लगा।

बढ़ाई गई सुरक्षा-

साल 2020 के सितंबर महीने में चीन जैविक विविधता सम्मेलन के नाम से एक वैश्विक बैठक आयोजित करने जा रहा है जिसमें प्राकृतिक और जैविक संसाधनों पर चर्चा की जाएगी।

बीते साल जारी हुई एक अंतर-सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक़, मानव इतिहास में पहली बार दस लाख प्रजातियों पर विलुप्त होने का ख़तरा मंडरा रहा है।

कोरोना वायरस के फैलने के बाद चीन के सरकारी मीडिया में छपी संपादकीय लेख जानवरों और उनके अंगों को लेकर जारी अनिंयत्रित व्यापार की निंदा करते नज़र आए हैं।
चीन में जानवरों के व्यापार को लेकर जांच करने वाली संस्था इन्वॉयरनमेंट इंवेस्टिगेशन एजेंसी से जुड़े डेबी बैंक्स बताते हैं, “इस इसे एक अवसर के रूप में देखते हैं जिससे वन्य जीवों के पालन, प्रजनन, पालतू बनाए जाने और मांस के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा सके।”

विशेषज्ञ मानते हैं कि एविएन इंफ्लूएंजा और बर्ड फ़्लू की वजह से कई जंगली पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण में मदद मिली है।

विशेषज्ञ हाथियों को विलुप्तीकरण से बचाने के अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से चीन में लगाए गए हाथी दांत पर प्रतिबंध को एक सफलता के रूप में देखते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक़, चीन जंगली जानवरों और उनके शरीर के अंगों का सबसे बड़ा बाज़ार है, ऐसे में वह ऐसे प्रतिबंध का लागू करके इस मुहीम का नेतृत्व कर सकता है।

लेकिन जानवरों से जुड़े उत्पादों पर नियमन और प्रतिबंध सिर्फ चीन नहीं वैश्विक स्तर पर लगना जरूरी है।

  • नोवेल कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद स्वास्थ्य पहले की तरह होगा ?
  • इस वायरस से संक्रमित कई लोगों में हल्के-फुल्के लक्षण दिखाई देते हैं।
  • इनमें बुखार, खांसी और सांस लेने में होने वाली दिक्कतें शामिल हैं।
  • ज़्यादातर लोग इस संक्रमण से निकलने के बाद पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
  • लेकिन ये वायरस वृद्ध लोगों और पहले से डायबिटीज़ और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद ख़तरनाक है।
  • इसके साथ ही ख़राब रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए ये भी बेहद ख़तरनाक है।

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *