संगीत को भारत से बाहर अन्य देशों में केवल गीत और वाद्य को संगीत में गिनते हैं नृत्य को एक भिन्न कला मानते हैं।
संगीत में बहुत शक्ति होती है, संगीत जहाँ एक ओर बना सकता है वही एक ओर बिगाड़ भी सकता है।
मनुष्य की तो बात ही क्या है म्यूज़िक के माध्यम से पशु पक्षी व पेड़ पोधो पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
संगीत के मोहन-सुर की मादकता का जीव जगत पर जो प्रभाव पड़ता है, वह किसी से छिपा नहीं है।

संगीत हमारे जीवन में आंतरिक और आवश्यक भूमिका निभाता है।
मनुष्य अनुशासन की परिधि में रहकर म्यूज़िक को प्रकट करता है, किन्तु प्रत्येक व्यक्ति के विचार, संवेदना,
बुद्धिमता एवं कल्पना में विविधता होने के कारण प्रस्तुति में भी विविधता अवश्य होती है।
म्यूज़िक का अब सम्मोहिनी विद्या के रूप में विदेशों में विकास किया जा रहा है।
अनेक डाक्टर सर्जरी जैसी डाक्टरी आवश्यकताओं में संगीत की ध्वनि-तरंगों का उपयोग करते हैं,
अमेरिका में बड़े स्तर पर संगीत की सृजनात्मक शक्ति की खोज की जा रही है ।
लोग कहेंगे यह भावुक अभिव्यक्ति मात्र है, किन्तु वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने म्यूज़िक की उन विलक्षण बातों का पता लगाया है,
जो मनुष्य शरीर में शाश्वत चेतना को और भी स्पष्ट प्रमाणित करती है।

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संगीत का मानव जीवन में अहम स्थान है। यह हमारे साथ जन्म से लेकर मृत्यु तक रहता है।
म्यूज़िक वो शक्तिशाली यंत्र है, जो हमारी ध्यान की शक्ति को बढ़ाता है और हमेशा हमारी आगे बढ़ने में मदद करता है
तथा हमें हमारे जीवन में सफलता के ओर अग्रसित करता है।
युद्ध, उत्सव और प्रार्थना या भजन के समय मानव गाने बजाने का उपयोग करता चला आया है।
प्राचीन समय से मानव म्यूज़िक की आध्यात्मिक एवं मोहक शक्ति से प्रभावित होता आया है।
सुव्यवस्थित ध्वनि, जो रस की सृष्टि करे,म्यूज़िक कहलाती है।

गायन, वादन व नृत्य तीनों के समावेश को संगीत कहते हैं..

म्यूज़िक नाम इन तीनों के एक साथ व्यवहार से पड़ा है।
गाना, बजाना और नाचना प्रायः इतने पुराने है जितना पुराना आदमी है।
संगीत की शक्ति ऐसी है कि सिर्फ एक वाद्य यंत्र जैसे ड्रम या बांसुरी या गिटार बजाकर आप यह बता सकते हैं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं या आप क्या कर रहे हैं।
आप म्यूज़िक की मदद से सबसे तीव्र भावनाओं को भी व्यक्त कर सकते हैं।

म्यूज़िक के मोहन-सुर की मादकता का जीव जगत पर जो प्रभाव पड़ता है, वह किसी से छिपा नहीं है। आइये जानते हैं संगीत सुनने के फायदे।
अगर आप म्यूज़िक सुनने के शौकीन है तो यह आपके लिए बहुत बड़ी खुश-खबरी है क्योंकि संगीत सुनने से तन और मन दोनों ही बहुत स्वस्थ होते हैं।
रिसर्च यह बताती है अगर आप अपने पसंद का म्यूज़िक सुनते है तो आपका मूड खुश-मिजाज़ रहता है और सोचने-समझने की शक्ति भी बढ़ती है।
इतना ही नहीं अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित है तो वो समस्या भी धीरे-धीरे सुधरने लगती हैं।

म्यूज़िक बच्चे से वृद्ध तक है फ़ायदेमंद…

  1. पुरुष.. शौध के अनुसार जो पुरुष रोजाना संगीत सुनते है वे दूसरों के मुकाबले में अधिक सकारात्मक होते है। जिससे उनकी निजी और कामकाजी जिंदगी सुखद होती है।
  2. महिला.. अमेरिकन स्टडी यह दावा करती है जो महिला गर्भावस्था के समय संगीत को सुनती है उन्हें दर्द का सामना कम करना पड़ता है और डिलीवरी की भी कम चिंता करती है।
  3. बच्चे.. हांगकांग की रिसर्च के अनुसार जो बच्चे संगीत की शिक्षा लेते है वे पढ़ाई में भी अव्वल रहते है। एक दूसरी रिसर्च यह भी कहती है ऐसे बच्चे अधिक मिलनसार, मददगार और एकाग्र होते है।
  4. वृद्ध.. शौध के अनुसार जो व्यक्ति शुरू से ही संगीत का रियाज़ या सीखने में लीन रहते है वें बुढ़ापे में भी बेहतर तरीके से काम करते है। म्यूज़िक से दिमाग जवा रहता है इस कारण वे बुजुर्ग होने के बाद भी दिमाग से बेहतर सोच व समझ पाते हैं।

म्यूजिक यानी गीत का संग। रोजाना 20-30 मिनट संगीत के साथ बिताने से हमारा अकेलापन व तनाव भी दूर होता हैं।
लाइफ हैक मैगज़ीन के मुताबिक, महान भौतिक शास्त्री अल्बर्ट आइंस्टीन भी म्यूजिक सुनना बहुत पसंद करते थे।
उनका मानना था कि अगर वह भौतिक शास्त्री नहीं होते, तो जरूर म्यूजिशियन बनते।

म्यूजिक सुनने से ब्लड-प्रेशर और स्ट्रोक में सुधार होता…

रोज़ सुबह-शाम कुछ मिनटों तक संगीत सुनने से उच्च-रक्तचाप का स्तर सुधरता है।
लाइट म्यूज़िक की आदत से स्ट्रोक की समस्या भी दूर होती है।
संगीत हृदय की रिकवरी कर उसे मजबूत बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता हैं।
रिसर्च बताती है की संगीत में तीन तंत्रिका तंत्र होते है जिससे दिमाग रिलैक्स करता है और जिन मरीजों को स्ट्रोक की समस्या है उनकी भी रिकवरी में संगीत सहायक है।
स्ट्रोक की समस्या अगर आ भी गई है तो भी बिस्तर पर स्लो म्यूज़िक सुने, इससे आराम तो मिलेगा ही साथ ही तनाव कम होगा और रिकवरी फास्ट होगी।
संगीत दिमाग के क्षतिग्रस्त हिस्सों की रिकवरी उत्तेजित करता हैं।
जिससे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बहुत सुधार आता है।

म्यूजिक रक्त वाहिका की कार्य प्रणाली को रखे दुरुस्त…

जब आप खुश नुमा संगीत सुनते है तो आप अच्छा और खुश महसूस करते है।
संगीत सुनते वक्त आपके दिल और रक्तवाहिका के कार्य पर पॉज़िटिव असर पड़ता है।
संगीत से शरीर में Endothelium Functionality पर असर पड़ता है जिससे रक्त कोशिकाओं की परत बनती है।
अच्छा म्यूज़िक सुनने से पैदा होने वाली भावनाओं का रक्तवाहिका के कार्य पर पॉज़िटिव असर पड़ता हैं।
संगीत की आदत से नाइट्रिक ऑक्साइड बढ़ता है जिससे रक्तवाहिकाओं के विस्तार में मदद मिलती है।
इससे रक्तवाहिकाएँ स्वस्थ और लचकदार बनती है।

संगीत तनाव और चिंता को दूर करता…

संगीत सुनने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता हैं।
कोर्टीसोल के स्तर को कम करके यह तनावग्रस्त मांसपेशियों के आराम को बढ़ावा देता है।
जिससे आप पहले की तुलना में अधिक आशावादी और सकारात्मक महसूस करते हैं।
कई अध्ययनों से यह साबित हुआ है की म्यूज़िक सुनने से दिमाग रिलैक्स मोड में चला जाता है जिससे मसल्स को आराम मिलता है। हाल ही में टोक्यो में हुई एक रिसर्च के मुताबिक अगर इंसान संगीत का सहारा ले तो चिंता, डिप्रेशन, टेंशन के लेवल को कम कर सकता हैं।
क्लासिकल म्यूजिक इसमें ज्यादा फायदेमंद हैं।
रेग्युलर म्यूजिक सुनने से ब्रेन फंक्शन बेहतर होते है, इससे क्रिएटिविटी बढ़ती है।

दर्द में राहत, चाहे मानसिक हो या शारीरिक…

दर्द चाहे मानसिक हो या शारीरिक, म्यूजिक दोनों में ही अपनी छाप छोड़ता हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए संगीत में ग़जब की क्षमता होती हैं।
एक अध्ययन में पाया गया की असहनीय दर्द में जब रोगी को संगीत सुनाया गया तो वह अपने दर्द की प्रतिक्रिया देना भूल ही गया।
क्योंकि दर्द और चिंता से पीड़ित लोग बहुत जल्दी संगीत में अवशोषित हो जाते हैं और दर्द से तुरंत राहत महसूस करते हैं।
अलबर्टा यूनिवर्सिटी में 3-11 साल की उम्र के 42 बच्चों पर शौध किया गया।
जिन बच्चों को अच्छा संगीत सुनाया गया, उन्हें इंजेक्शन लगाने के दौरान कम दर्द हुआ।

बच्चों को अच्छा संगीत सुनाया गया, उन्हें इंजेक्शन लगाने के दौरान कम दर्द हुआ।

म्यूजिक कम खाने में मददगार साबित होता है…

भोजन के दौरान अगर सॉफ्ट म्यूज़िक सुना जायें तो खाना खाने वाले का पेट जल्दी भरता है।
म्यूज़िक ऐसे लोगों को जागरूक बनाता है की आपका पेट भर चुका है।
एक शोध से यह सामने आया है की संगीत कॉलेरी के सेवन को कम करके संयम बनाने में मदद करता हैं।
चिंता में व्यक्ति कार्बोहाइड्रेट और वसा युक्त भोजन को खाने की ज्यादा इच्छा रखता है।
जैसा की आप जानते है संगीत से चिंता भी दूर होती है और इससे आपको स्वस्थ खाने में मदद मिल सकती हैं।

संगीत कॉलेरी के सेवन को कम करके संयम बनाने में मदद करता हैं।

प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता हैं…

म्यूजिक से आपके शरीर में इम्मुनोग्लोबुलिन ए में वृद्धि होती हैं।
यह एंटीबॉडी श्लेष्म प्रणाली में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है और कोशिकाओं को स्वस्थ रखती है।
जिससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत बनता हैं।
संक्रामक बीमारियों से पीड़ित रोगियों के उपचार के दौरान संगीत का असर प्रतिरक्षा प्रणाली पर सकारात्मक पड़ता हैं।
अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने और बार-बार बीमार होने से अपने आपको रोकने के लिए पसंदीदा म्यूज़िक सुनना जल्द शुरू करें।

संगीत सुनने से नींद होती बेहतर…

अगर आप अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे है तो सोते समय सुखदायक संगीत सुनना शुरू कर दीजिए।
रॉक या रेट्रो म्यूज़िक से रात को दूर रहे, नहीं तो परिणाम विपरीत भी आ सकते है।
सोने से कुछ समय पहले शास्त्रीय संगीत को सुने।
क्योंकि शास्त्रीय संगीत सहानुभूति तंत्रिका तंत्र की गतिविधि को कम करके चिंता को घटाता है, मांसपेशियों को आराम देता हैं,
और उन विचारों की व्याकुलता को दूर करता है जो आपके सोने में बाधक हैं।
एक सुखद नींद के लिए सोने से पहले 30-45 मिनट का संगीत सुनने की आदत अवश्य डालें।

संगीत सुनने से नींद होती बेहतर

म्यूजिक सुनने से बच्चे निडर बनते हैं…

अगर किसी बच्चे की सर्जरी होनी है और उसे इस दौरान म्यूज़िक सुनाया जायें तो बच्चे की मसल्स रिलैक्स मोड़ में चली जाती है और बच्चा पहले की तुलना में ज्यादा निडर महसूस करता है।
म्यूज़िक के दौरान बच्चों को बीमारी में दर्द का अहसास भी कम होता है।
जो बच्चे म्यूज़िक नहीं सुनते उनकी तुलना में म्यूज़िक सुनने वाले बच्चों के मस्तिष्क का विकास और याददाश्त भी बेहतर होती है।

पीठ दर्द को कम करे…

ओटोनोमिक, नर्वस सिस्टम का एक पार्ट होता हैं।
जो उच्च-रक्तचाप, दिल की धड़कन और दिमाग की कार्य-प्रणाली को कंट्रोल करता हैं।
संगीत सुनने का सबसे ज्यादा असर भी इसी भाग पर पड़ता है वो भी सकारात्मक।
जब कोई धीमा संगीत सुना जाता है तो उच्च-रक्तचाप और दिल की धड़कन भी धीमी हो जाती है।
जिस वजह से हम आराम से और बेहतर सांस ले पाते हैं।
बेहतर और पर्याप्त सांस लेने की वजह से पेट, कंधे, गले और बैक में मांसपेशियों का खिचाव कम हो जाता है जिससे हम गंभीर बैकपैन यानी पीठ दर्द से बच जाते हैं।
ऑस्ट्रीया में हुई एक रिसर्च में यह पाया गया की जिन लोगों को बैक सर्जरी के बाद म्यूज़िक थैरेपी दी गई उन्हें सर्जरी के बाद बैकपैन में बहुत राहत मिली।
यह रिसर्च 21 से 28 साल के व्यक्तियों पर की गई थी।

म्यूजिक मेमोरी को स्ट्रांग करता….

यदि आप कुछ भी पढ़ते वक्त अपनी पसंद का स्लो म्यूज़िक सुनते है तो पढ़ा हुआ बेहतर याद रहता है।
म्यूजिक सीखने की गति को तेज करता है क्योंकि संगीत डोपामाइन रिहाई को बढ़ाता है जो सीखने में मदद करता है।
संगीत दिमागी रोगों से पीड़ित लोगों की भी मदद करता हैं।
पसंदीदा म्यूज़िक सुनने से स्ट्रोक का खतरा कम होता है और ध्यान में भी एकाग्रता लाता है।
कमजोर याददास्त वाले लोग शब्द भले ही भूल जायें लेकिन संगीत नहीं भूलते।
ऐसा इसलिए होता है दिमाग का जो पार्ट संगीत प्रोसेस करता है ठीक उसके पास वाला पार्ट ही याददास्त से जुड़ा होता है।
इसलिए मेमोरी का संगीत से अटूट संबंध हैं।

सुकरात एक महान दार्शनिक The Great Philosopher

वर्कआउट बेहतर होता है…

म्यूजिक आपकी थकान को दूर करके साइकोलॉजिकल उत्तेजना में वृद्धि करता है जिससे व्यायाम में सहायता मिलती है।
ब्रूनल विश्वविधयालय में हुई रिसर्च के अनुसार संगीत और हृदय का व्यायाम के दौरान एक गहरा संबंध रहता है।
इसलिए व्यायाम के वक्त उत्साहित संगीत सुनना ना भूले।
एक्सपर्ट्स का मानना है वर्कआउट के समय संगीत सुनने से हमारी endurance में वृद्धि होती है,
जिससे कसरत के वक्त मूड अच्छा रहता हैं और हमें लंबे समय तक व्यायाम करने को प्रेरित करता हैं।
इसलिए ही जिम में स्लो म्यूज़िक को प्ले किया जाता हैं।

म्यूजिक के प्रति महान लोगो के विचार…

विलियम जेम्स, अमेरिकी दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक का कहना था ”मैं इसलिए नहीं गाता, क्योंकि मैं खुश हूँ।
बल्कि मैं गाता हूं इसलिए खुश हूँ।”
म्यूजिक का असर हमारे तन और मन दोनों पर पड़ता है। इसलिए जब भी समय मिले संगीत जरूर सुने।
इससे आप बुढ़ापे में भी अपने आपको फ्रेश महसूस करेंगे।
उम्र के साथ आपका दिमाग तेज ही होगा क्योंकि संगीत से दिमाग की कसरत होती हैं।

इसी वजह से आजकल अस्पतालों में भी संगीत का सहारा लिया जा रहा है क्योंकि देखा गया है,
जिन मरीजों को संगीत सुनाया जाता है उनके स्वस्थ होने में समय भी कम लगता हैं।
संगीत अपने आपमें एक जादू है। इसलिए इसका चयन भी अच्छा ही होना चाहिए।
क्योंकि हम जैसा म्यूज़िक सुनते है हमारा मूड भी वैसा ही हो जाता है।
इसलिए जिस संगीत को हम पसंद नहीं करते उसे नहीं सुनना चाहिए।
नहीं तो हम तनाव, उदासी, बेरूख़ी और बीती यादों में चले जाते है जो किसी भी लिहाज से हमारे मन-मस्तिष्क के लिए अच्छा नहीं हैं।

हर व्यक्ति को अलग-अलग तरह का संगीत सुकून देता हैं।
इसलिए जब हम अपनी पसंद का संगीत सुनते है तो वो हमारा मनोरंजन ही करता है।
संगीत हमारी आत्मा को एक अनोखा सुकून देता है।
संगीत सुनने से हम बच्चे की तरह शांत, खुश और निश्चिंत महसूस करते है।
म्यूजिक-न्यूरोसाइंस पर रिसर्च कर रहे साइकोलॉजिस्ट डेनियल जे. लेविटिन यह बताते है कि मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के मामले में म्यूजिक चिकित्सा के नतीजे बेहद ही रोचक और सुखद हैं।

इस रिसर्च से यह भी सामने आया की इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर पॉज़िटिव असर पड़ता हैं।
तनाव वाले हार्मोन कम होते है।
इतना ही नहीं माँ की लोरी को भी महत्वपूर्ण माना गया हैं।
क्योंकि लोरी सुनने की आदत से बच्चा शांत व सजग रहता है।

बच्चे को नींद भी अच्छी आती है और वह बार-बार रोता भी नहीं।
म्यूजिक थैरेपी से गर्भावस्था के समय महिलाओं में भी तनाव को कम पाया गया।
संगीत सुनने की आदत आत्मा और शरीर के लिए एक दवा का काम करता हैं।
कई रोगों में जहाँ दवा काम नहीं करती वहाँ संगीत अपना जादुई असर दिखाता हैं।
क्योंकि संगीत इंसान में जीने की भावना को जन्म देता हैं।
इस बात को कोई नहीं नकार सकता की संगीत हजारों सालों से हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा रहा है।
पृथ्वी पर संगीत को हर संस्कृति में पूजा जाता है क्योंकि संगीत से ही हर संस्कृति की पहचान हैं।

इतना ही नहीं संगीत सुनने से किसी भी प्रकार की सूजन कम होती है, रक्त प्रवाह सामान्य हो जाता है,
सिरदर्द की प्रॉब्लम दूर होती हैं, ऐथलेटिक पर्फारमेंस अच्छी होती है, रक्त संबंधी और हृदय संबंधी रोगों से भी मुक्ति मिलती है। एंग्जाइटी में संगीत उतना ही लाभ देता है जितना दो घंटे की मसाज लेने से होता है।
म्यूजिक बेहतरीन मूड-एलीवेटर भी है।
किसी भी तरह की सर्जरी के बाद अपना पसंदीदा पॉप, जैज या क्लासिकल म्यूजिक सुनने से मरीज के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है।

फिनलैंड में हुई एक शौध के अनुसार इस तथ्य को बताया जाता है।
विदेशों में म्यूजिक थेरेपी का चलन बहुत ही आम है।
लेकिन वर्तमान में लोगों की जीवनशैली बहुत से तनाव और परेशानियों से घिरी हुई है।
हर किसी के पास काम तो बहुत है पर समय नहीं और इसी उधेड़बुन में संगीत तो क्या तनाव के बारे में भी सोचने का किसी के पास वक्त नहीं।
जिस तरह हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक खाने की आवश्यकता पड़ती है ठीक उसी तरह हमारी आत्मा को स्वस्थ और सकारात्मक रखने के लिए म्यूजिक की आवश्यकता पड़ती है।

इसमें भारतीय राग आपकी बहुत मदद कर सकता है क्योंकि राग से हृदय गति में सबसे ज़्यादा सुधार आता है।
आप चाहें कितने भी व्यस्त क्यों ना हो हम यही कहेंगे कुछ समय अपने लिए भी निकाले और म्यूजिक का संग करे।
क्योंकि कई शोध यही बताती है म्यूजिक का असर हमारे शरीर और मन दोनों पर पड़ता है।
उम्मीद है हमारे ब्लॉग पर संगीत सुनने के फायदे कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फ़ायदेमंद भी साबित होगी।


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