सिकंदर यानि कि अलेक्जेंडर एक यूनानी था।(356 ईपू से 323 ईपू) मकदूनियाँ, (मेसेडोनिया) का ग्रीक प्रशासक था।
उसका एकमात्र लक्ष्य विश्व-विजेता बनना था ना कि विश्व-सम्राट बनाना।
अपने सपने को पूरा करने के लिए एक बड़ी सेना का निर्माण करके वह दुनिया को जीतने निकल पड़ा।

इतिहास में वह कुशल और यशस्वी सेनापतियों में से एक माना गया है।
उसके विजय रथ को रोकने में सबसे मुख्य भूमिका भारत के राजा पुरु ( युनानी इतिहास में पोरस के नाम सम्बोधित किया है)

भारत के क्षेत्रीय सरदारों ने मिलकर सिकंदर की सेना में अपने पराक्रम के दम पर भारत के प्रति खौफ पैदा कर उसके हौसले पस्त कर दिये और उसे भारत से लौटने पर मजबूर कर दिया।
सिकंदर ने इरान, सीरिया, मिस्र, मसोपोटेमिया, फिनीशिया, जुदेआ, गाझा, बॅक्ट्रिया और भारत में पंजाब( जिसके राजा पुरु थे) तक के प्रदेश पर विजय हासिल किया परन्तु बाद में वो मगध की विशाल सेना से डर कर वापिस लौट गया।

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336 ईसा पूर्व की गर्मियों में, एयगे में अपनी बेटी क्लियोपेट्रा के विवाह में भाग लेते हुए फिलिप को उसके अंगरक्षकों के कप्तान, पॉसनीस द्वारा मार दिया जाता है।
जब पॉसनीस भागने का प्रयास करता है तो सिकंदर के दो साथी, पेर्डिकस और लेओनाटस ने उसका पीछा कर उसे मार देते है। उसी समय, 20 वर्ष की उम्र में सिकंदर को रईसों और सेना द्वारा राजा घोषित कर दिया जाता है।

16 वर्ष की आयु में अरस्तू से शिक्षा प्राप्त कर सिकंदर राज्य में वापस आ जाता है।
उसी समय फिलिप ने बाइजेंटियम के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया,
और सिकंदर को राज्य का प्रभारी बना कर उसकी देख रेख में छोड़ दिया।
फिलिप की अनुपस्थिति के दौरान, थ्रेसियन मैदी ने मैसिडोनिया के खिलाफ विद्रोह कर दिया।
सिकंदर ने तुरंत उनके खिलाफ़ अभियान चला कर उन्हें अपने इलाके से खदेड़ दिया।

बाद में उसी इलाके में यूनानियों के साथ एक उपनिवेश स्थापित कर अलेक्जेंड्रोपोलिस नामक एक शहर की स्थापना भी की।
सिंहासन संभालते ही सिकंदर अपने प्रतिद्वंद्वियों को खत्म करने लगा।
जिसकी शुरुआत उसने अपने चचेरे भाई, पूर्व अमीनटस चौथे की हत्या करवा के की।
उसने लैंकेस्टीस क्षेत्र के दो मैसेडोनियन राजकुमारों को भी मार दिया,
हलांकि तीसरे, अलेक्जेंडर लैंकेस्टीस को छोड़ दिया।

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ओलम्पियस ने क्लियोपेट्रा ईरीडिइस और यूरोपा को, जोकि फिलिप की बेटी थी, जिंदा जला दिया।
जब अलेक्जेंडर को इस बारे में पता चला, तो वह क्रोधित हुआ।
सिकंदर ने अटलूस की हत्या का भी आदेश दिया, जोकि क्लियोपेट्रा के चाचा और एशिया अभियान की सेना का अग्रिम सेनापति था।

एशिया को पार करने से पहले, सिकंदर अपनी उत्तरी सीमाओं को सुरक्षित करना चाहता था।
335 ईसा पूर्व के वसंत में, वह कई विद्रोहों दबाने के लिए चल पड़ा।
एम्पीपोलिस से शुरू होकर, वह “स्वतंत्र थ्रेसियन” के देश में पूर्व की ओर यात्रा करता रहा,
और हेमस पर्वत पर, मैसेडोनियन सेना ने थ्रेसियन सेनाओं को ऊंचाइयों पर भी हमला कर पराजित किया।

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आगे सेना ट्रिबाली देश में घुस गए और उन्होंने उनकी सेना को लईजिनस नदी (डेन्यूब की एक सहायक नदी) के पास हराया। सिकंदर ने डेन्यूब के लिये तीन दिन की यात्रा की, और रास्ते में विपरीत किनारे पर स्थित गेटिए जनजाति का सामना किया।
रात को ही नदी पार करते हुए,
उसने उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया और पहली घुड़सवार झड़प के बाद उनकी सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।

भारत उपमहाद्वीप पर चढाई की योजना…

सिकंदर के सैनिकों के खिलाफ भारतीय युद्ध में हाथियों का इस्तेमाल।
स्पितमेनेस की मृत्यु और रोक्सेना के साथ उसकी नई शादी के बाद,
सिकंदर ने भारतीय उपमहाद्वीप कि ओर अपना ध्यान ले गया।
उसने गांधार (वर्तमान क्षेत्र में पूर्वी अफगानिस्तान और उत्तरी पाकिस्तान का क्षेत्र) के सभी प्रमुखों को आमंत्रित कर,
उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र सिकंदर के अधीन करने के लिये कहा।

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तक्षशिला के शासक आम्भी (ग्रीक नाम ओमफी), जिसका राज्य सिंधु नदी से झेलम नदी (हाइडस्पेश) तक फैला हुआ था,
इसे स्वीकार कर लिया, लेकिन कुछ पहाड़ी क्षेत्रों के सरदार,
जिसमें कंबोज क्षेत्र के अश्वान्यास (असंबी) और अश्वकन्यास (आंडेनोयोई) ने मानने से मना कर दिया।

आम्भी ने सिकंदर को दोस्ती का यकीन दिलाने और उन्हें मूल्यवान उपहार देने,
उसके सभी सेना के साद खुद उसके पास गया।
सिकंदर ने ना केवल उसे उसका पद और उपहारों को लौटा दिया,
बल्कि उसने अम्भी को “फ़ारसी वस्त्र, सोने और चांदी के गहने, 30 घोडे और 1,000 सोने की प्रतिभाएं” उपहार स्वरूप दे दिया।

सिकंदर ने किया अपनी सेना का बंटवारा…

अम्बी ने सिंधु नदी पर पुल के निर्माण करने में हिपेस्टियन और पेड्रिकस की मदद की,
साथ ही उसके सैनिकों को भोजन की आपूर्ति करता रहा।
उसने सिकंदर और उसकी पूरी सेना का उसकी राजधानी तक्षशिला शहर में दोस्ती का सबसे बड़ा प्रदर्शन करते हुए सबसे उदार आतिथ्य के साथ स्वागत किया।

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राजा पोरस के खिलाफ एक महायुद्ध…

326 ईसा पूर्व में सिकंदर ने सिंधु को पार किया और पोरस के खिलाफ एक महायुद्ध जीता,
जिसका झेलम (हाइडस्पेश) और चिनाब नदी (एसीसेंस) के बीच वाले क्षेत्र पर शासन था,
जो अब पंजाब का क्षेत्र कहलाता हैं।
सिकंदर व पोरस की बहादुरी से काफी प्रभावित हुए, और उसे अपना एक सहयोगी बना लिया।

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उसने पोरस को अपना उपपति नियुक्त कर दिया, और उसके क्षेत्र के साथ,
उसके अपने जीते दक्षिण-पूर्व में व्यास नदी (ह्यफासिस) तक के क्षेत्र को जोड़ दिया।
स्थानीय उपपति चुनने से ग्रीस से इतने दूर स्थित इन देशों को प्रशासन में मदद मिली।
सिकंदर ने झेलम नदी के विपरीत दिशा में दो शहरों की स्थापना की,
पहले को अपने घोड़े के सम्मान में बुसेफेला नाम दिया, जो कि युध्द में मारा गया था।
दूसरा, निकाया (विजय) था, जो वर्तमान में मोंग, पंजाब क्षेत्र पर स्थित हैं।


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