हिमालय पर्वत भारत के लिए  एक वरदान है

बर्फ की चादर ओड़े दिलकस पहाड़ और सफेद बादलो से सजा नीला आसमान सभी को भाता है

ये बर्फ से ढके पहाड हर साल लाखों सेलानियो को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

इन्ही पहाड़ों की लिस्ट में पे‍हला नाम आता है India के पहाड़ का जिसे भारत का ताज कहा जाता है.

तो दोस्तो आप जानते हैं कि हम किसके बारे में बात कर रहे हैं. जी हां दोस्तो हम बात कर रहे हैं हमे सबसे बड़ी सुरक्षा पर्दान करने वाले The Great Mountain of Himalayas.

दोस्तो इसके बिना हम भी सहारा रेगिस्तान की दूसरी कॉपी होते.

हिलालय को हमारी लाइफ लाइन भी कहा जाता है क्योंकि भारत की नदियों का उदगम स्थल माना जाता है.

इसकी गोद से निकलती नदिया उत्तर भारत के कई मेदानी छेत्रो का उपजाऊ भूमि के रूप में निर्माण करती हैं.

जिस पर लोग खेती कर अपनी आजीविका चलाते हैं. हिमालय भारत की प्रकृति का विशेष हिस्सा है.

भारत के लिए जीवन दान समझें जाने वाले इस पर्वत की खूबसूरती देखते ही बनती है.

यही कारण है कि हर साल लाखों की संख्या में सेलानी यहां आते हैं.

कई पर्वतारोहीयो के लिए हिमालय पर्वत उनका घर है. पर क्या आप जानते हैं कि उस हिमालय पर्वत का निर्माण कैसे हुआ?

हिमालय पर्वत का निर्माण…

तो चलिए आज हम बात करते हैं उस महान श्रंखला का निर्माण कैसे हुआ और अगर हिमालय पर्वत ना होता तो भारत की तस्वीर कैसी होती.

आप सभी ने बचपन में पड़ा है कि हिमालय दो शब्दो से मिलकर बना है.

हिम +आलय जिसका अर्थ होता है बर्फ का घर. बर्फ की सफेद चादर ओड़े ये श्रंखला 4 देशों में फैली हुई है.

हिमालय भारत की सबसे बड़ी पर्वत श्रंखला है जो देश के उत्तरी भाग से लेकर पूर्वांचल तक फैला हुआ है इस श्रंखला को यहां भारत में हिमालय के नाम से जाना जाता है वही नेपाल में इस श्रंखला को स्वर्ग के भाल और तिब्बत में इस चोटी को लैंड ऑफ स्नो (land of snow) के नाम से जाना जाता है.

लेकिन अधिकांश लोग यह नहीं जानते हैं कि ऐसीआ म्हादीप में फैली इस श्रंखला को बनने में करोड़ों सालों का समय लगा है.

इस चोटी की उत्पत्ति की शुरुआत तब हुई जब भारत अफ्रीका म्हादीप का हिस्सा हुआ करता था.

हिमालय की उत्पत्ति के सिध्दांत के मुताबिक चोटी का निर्माण दो प्लेटों के टकराने से हुआ.

जैसे कि हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी की सतह का निर्माण छोटे बड़े म्हादीपये पलेटो से मिलकर हुआ है.

ये पलेट्स लावा मे तैरती रहती है जब नीचे के लावा में हलचल होती है तो प्लेटस भी उसी हिसाब से आगे पीछे होती रहती है.

ठीक इसी तरह लगभग 15 करोड़ साल पहले दुनिया के सारे म्हादीप एक जगह इकठ्ठे थे.


पेंजयीआ (Pangea) का Map

उनके बीच कोई महासागर नही था और उस समय इस म्हादीपये समूह को पेंजयीआ (pangea) नाम से जाना जाता था.

पेंजयीआ के उत्तर में लाओरसिया (Laurasia) था और दक्षिण में गोंडवाना (Gondwana).

भारत उस समय गोंडवाना का हिस्सा हुआ करता था उस समय भारत नाम का कोई देश या जगह नहीं थी.

ये युग age of Dinosaurios के नाम से जाना जाता था यूँ कहिये कि डायनासोर का इस धरती पर राज हुआ करता था जिसे आज हम अपना घर कहते हैं.

Contingent Divide कैसे हुए…..

कुछ समय बाद धरती के आंतरिक भाग में हुई हलचल के कारण प्लेट्स ने सिरकना शुरू किया इसका परिणाम हुआ
लाओरसिया और गोंडवाना अलग अलग होने लगे|

लाओरसिया उत्तर की ओर जाने लगा और गोंडवाना दक्षिण की ओर| लेकिन भारत गोंडवाना का हिस्सा होते हुए भी दक्षिण की ओर नहीं खिसका बल्कि भारत यूरेशिया (Eurasia) प्लेट्स की ओर बढ़ने लगा|

जिससे भारत और यूरेशिया के बीच का समुद्र सिकुड़ने लगा | आपको बता दें कि इस सागर को टेथीस सागर (Tethys Ocean)के नाम से जाना जाता था|

ये एक समय में बहुत बड़ा सागर था लेकिन जब भारत यूरेशिया की ओर बढ़ता गया तो टेथीस का पानी धीरे-धीरे गायब होकर अरब खाड़ी और बंगाल की खाड़ी में चला गया |

जिससे भारत यूरेशिया की प्लेट्स से जा टकराया जब भारत और यूरेशिया टकराये तो दोनों के बीच की जमीन आसमान की ओर उठती चली गयी

हजारों मीटर जमीन के उठने के कारण एक पर्वत का निर्माण हुआ जिसे आज हम हिमालय के नाम से जानते हैं |

इस टकराव के कारण तीन श्रेणियां महान हिमालय, मध्य हिमालय और आखिर में शिवालिक की रचना हुई|

इस श्रृंखला का निर्माण उत्तर से दक्षिण की ओर है |

इससे बनने में काफी लंबा समय लगा लेकिन ऐसा नहीं है कि टकराव के बाद हिमालय की श्रृंखला का विकास रुक गया हो |

दरअसल हिमालय की प्लेट्स उत्तर की ओर खींचने के कारण आज भी इनकी ऊंचाई लगातार बढ़ रही है और आज भी हिमालय ऊपर उठते जा रहे हैं |

यही कारण है कि इस क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में अक्सर भूकंप का खतरा बना रहता है | हिमालय के पहाड़ी इलाकों की बनावट बेहद ही खास तरह की है |

यह एक तरह के फोल्ड माउंटेन (Fold Mountain) है जो दो प्लेट्स यानि लेयर्स (Layers) के आपस में फोल्ड होने के कारण बनते है |

दरअसल हिमालय का पर्वतीय क्षेत्र इतना नाजुक है कि यहां हर साल भूकंप और भूःस्खलन होता रहता है |

जिससे हिमालय से निकलती नदियों में पानी की मात्रा काफी बढ़ जाती है और यह नदियां हिमालय के मैदानी इलाकों में हरसाल भारी तबाही मचाती है |

लेकिन आप शायद नहीं जानते कि यही नदियाँ मैदानी क्षेत्रों को उपजाऊ भूमि और फसलों को सींचने के लिए पानी मुहैया कराती है |

इसी से भारत में किसानों को आजीविका मिलती है शायद यही कारण है कि लोगों के लिए हिमालय भारत के सिर का ताज है |

हिमालय के बिना भारत कैसा होगा…..

संसाधनों से भरा हिमालय जितना खूबसूरत है भारत के लिए उतना जरूरी भी है क्या आपने कभी सोचा है अगर हिमालय कि श्रृंखला का अस्तित्व न होता तो आज भारत की कितनी भयानक तस्वीर होती |

आपको जानकर शायद हैरानी होगी पर हिमालय के ना होने पर भारत की स्थिति पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता और उत्तर भारत एक रेगिस्तान की तरह सूखा और बेजान होता है |

हिमालय हमारे देश का महत्वपूर्ण खजाना है भारत की जलवायु को हर तरह से प्रभावित करता है |और इसी कारण से हमारे देश में मानसून वर्षा होती है |

हिमालय के कारण ही उत्तर के मैदानी इलाकों की आनाज की आपूर्ति को पूरा करने के लिए पर्यापत पानी मुहयिआ होता है |

अगर हिमालय नहीं होता तो आज भारत के उत्तरी इलाकों में मौसम खतरनाक कहर बरपाता | ये पर्वत श्रंखला सदियों से मध्य एशिया से आने वाली ठंडी हवाओं को रूकती है जिससे भारत कड़ाके की ठंड से बचा रहता है |

मध्य एशिया से आने वाली हवाएं इस पर्वत को पार कर भारत तक नहीं पहुंच पाती और इसी कारण सर्दियों के बर्फीले कह के बाद भारत पर नहीं पड़ती |

लेकिन चीन इन हवाओं से अछूता नहीं रहता और इसलिए सर्दियों (Winters) में चाइना (China) पूरी तरह बर्फ की चादर ढक जाता है |

ये पर्वत हमें चीन से आने वाली ठंडी हवाओं से तो बचाता ही है इसके साथ ही यह मानसूनी हवाओं को भी रोकता है जिसके कारण तमाम हिस्सों में बारिश होती है और किसानों को फसल उगाने के लिए पर्याप्त पानी मिल जाता है|

गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र….

हिमालय भारत में बहने वाली लगभग सभी नदियों का घर है जहां गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र देश की लगभग सभी बारहमासी नदियां हिमालय के पहाड़ो या ग्लेसिअर से उत्पन्न होती है |

इसके साथ ही यह नदियाँ अपने साथ पहाड़ो से उपजाऊ मिट्टी मैदानों तक लाकर उन्हें हरा भरा बनाती है | जिससे भारत को खेती के लिए उपजाऊ भूमि मिलती है |

अगर ये पर्वत ना होता तो भारत की जमीन बंजर होती ऐसी अवस्था में ना तो कोई नदिया होती और ना ही वहां जीवन पनप पता |

इसलिए हिमालया की नदीयां उत्तर भारत के लोगों के लिए जीवन रेखा जैसी है |

ये नदीयां भारी बारिस और ग्लेशियर्स के कारण सदाबहार बनी रहती है |

इतनी विशेस्ताओं के साथ इस पर्वत एक और बहुत महत्वपूर्ण खूबी है कि ये भारत को मध्य एशिया के देशों के आक्रमण से बचाता है |

इस पर्वत की इतनी ज्यादा ऊंचाई के कारण यहां पर बड़े-बड़े बर्फ के ग्लेशियर पाए जाते हैं इसके साथ ही इस पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई में जाने पर हवा का दबाव कम हो जाता है |

ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है ऐसे में किसी भी देश की आर्मी का भारत पर कब्जा करना बहुत मुश्किल हो जाता है| हिमालय हमारे देश के लिए जीवनदाता तो है ही साथ में हमारा रक्षक भी है |

हिमालय कि गहरी घाटियां बिजली बनाने के लिए सबसे बढ़िया जगह है जहां पर कई जगह ऐसे प्राकर्तिक झरने हैं जिसके कारण हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी जेनरेशन में आसानी होती है |

हिमालय से निकलने वाली नदियां जैसे अलकनंदा ,मंदाकिनी, जमुना के जल से बिजली उत्पन्न की जाती है जिसे हर भारतीय के घर में बिजली पहुंचती है |

अगर हिमालय का अस्वतित्व ना होता तो भारत को मजबूरन अँधेरे तले जीवन बसर करना पड़ सकता था |

इसका प्रवाह इतना ज्यादा होगा कि ना तो कोई ट्रेन होगी और ना ही किसी भी उद्योग में निर्माण कार्य होगा |

सभी उद्योग और रेलों को चलाने के लिए बिजली तो होगी ही नहीं इसलिए भारत की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए हिमालय का होना बहुत जरूरी है |

लेकिन हाल ही के दशक से भारत में स्थिति कुछ यूँ है कि लगातार हिमालय के प्राकर्तिक संसाधनों का दुरूपयोग किया जा रहा है |

हमने विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने कि होड़ मे इसके प्राकर्तिक संतुलन के साथ ऐसे छेड़ छाड़ की है जिससे धीरे -धीरे हिमालय के संसाधन खत्म होते जा रहे है|
बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय के ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं |
अगर ऐसा होता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हिमालय के सभी ग्लेशियर पिघल जायेंगे |
जिससे नदीयों में पानी की मात्रा बहुत तेजी से बढ़ेगी और उत्तरी मैदानों में बाढ़ की स्थति पैदा हो जाएगी |

ऐसे में हिमालय अपने गलिशर्स को खोने के साथ ही भारत को ना तो मानसून में पानी दे पायेगा और ना ही सर्दियो में ठंडी हवाओं से वचा पायेगा |
परिणाम ये होगा की भारत ना तो फसल ऊगा पायेगा और ना ही अपनी आजीवका को वचा पायेगा |
धीरे-धीरे सब कुछ जलते रेगिस्तान में तब्दील हो जायेगा |


3 Comments

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