गुलशन की बहारों पे सर-ए-शाम लिखा है,
फिर उस ने किताबों पे मेरा नाम लिखा है,
ये दर्द इसी तरह मेरी दुनिया में रहेगा,
कुछ सोच के उस ने मेरा अंजाम लिखा है।

खामोशियाँ कर देतीं बयान तो अलग बात है,
कुछ दर्द हैं जो लफ़्ज़ों में उतारे नहीं जाते..!!

बदलना आता नही हमे मौसम की तरह ,
हर एक रुत में तेरा इंतज़ार करते है ,,
ना तुम समझ सकोगे जिसे कयामत तक ,
कसम तुम्हारी तुम्हे हम इतना प्यार करते है !!


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